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हरिद्वार, 15 अप्रैल (हि.स.)। लक्सर क्षेत्र सहित पूरे जनपद में निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी को लेकर आम जनता, अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। आरोप है कि कई निजी विद्यालय एनसीईआरटी का नाम लेकर केवल औपचारिकता निभाते हुए एक-दो किताबें ही शामिल करते हैं, जबकि अधिकांश पाठ्यक्रम महंगी निजी पब्लिकेशन की किताबों से भर दिया जाता है।
इस व्यवस्था के चलते अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है और शिक्षा व्यवस्था पर व्यवसायीकरण के आरोप लग रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता रविंद्र सिंह आनंद ने आरोप लगाया कि लक्सर क्षेत्र के कई निजी स्कूल राजनीतिक और प्रभावशाली लोगों से जुड़े हैं, जो जन सेवा के नाम पर अभिभावकों के साथ मनमानी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले करीब 10 वर्षों में प्रदेश में लगभग ढाई हजार सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं, जिससे आम लोगों के बच्चों के लिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विकल्प कमजोर होता जा रहा है।
ग्रामीण और किसान परिवारों पर इस बढ़ते आर्थिक बोझ को अन्यायपूर्ण बताते हुए उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जनहित में व्यापक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला