संविदा कर्मियों की छंटनी व बिजलीकर्मियों के उत्पीड़न के विरोध में जन-जागरण अभियान शुरू
लखनऊ, 15 अप्रैल (हि.स.)। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार संविदाकर्मियों की बड़े पैमाने पर छंटनी, आंदोलनरत कर्मचारियों पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों तथा बिजली क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में प्रदेश
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश


लखनऊ, 15 अप्रैल (हि.स.)। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार संविदाकर्मियों की बड़े पैमाने पर छंटनी, आंदोलनरत कर्मचारियों पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों तथा बिजली क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान प्रारंभ हो गया है। इस अभियान के अंतर्गत संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों का प्रदेशव्यापी दौरा 16 अप्रैल से शुरू होकर 21 मई तक चलेगा।

इस बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के महानिदेशक द्वारा पावर कारपोरेशन प्रबंधन को स्पष्ट रूप से सूचित कर दिया गया है कि आउटसोर्स संविदा कर्मियों को निगम के प्रावधानों से अलग रखने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता। महानिदेशक ने यह भी स्पष्ट किया है कि निगम के गठन के बाद किसी भी प्रकार की छूट या संशोधन केवल मुख्यमंत्री के अनुमोदन से ही संभव है।

संघर्ष समिति ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए मांग को और तेज कर दिया है कि पावर कारपोरेशन एवं सभी ऊर्जा निगमों के आउटसोर्स संविदा कर्मियों को पूर्णतः आउटसोर्स सेवा निगम के अंतर्गत रखा जाए तथा हटाए गए सभी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल किया जाए।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार यह प्रदेशव्यापी दौरा सहारनपुर से प्रारंभ होकर सोनभद्र (अनपरा) तक चलेगा। लगभग 36 दिनों के इस अभियान में प्रदेश भर में करीब 60 सभाएं, 5 बड़ी रैलियां तथा प्रत्येक जनपद में प्रेस वार्ताएं आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से आम जनता, किसानों और उपभोक्ताओं को निजीकरण, वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग, संविदा कर्मियों की छंटनी तथा नियमित पदों में कटौती के बिजली व्यवस्था पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से अवगत कराया जाएगा।

आंदोलन के दौरान उपभोक्ताओं और किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। संघर्ष समिति का सदैव यह प्रयास रहा है कि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो। किंतु प्रबंधन द्वारा लगातार किए जा रहे उत्पीड़न के कारण ऊर्जा निगमों में कार्य का वातावरण गंभीर रूप से प्रभावित हो चुका है, जिसका असर आने वाले गर्मी के मौसम में बिजली व्यवस्था पर पड़ सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्‍द्र पाण्डेय