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मुंबई, 15 अप्रैल (हि.स.)। अमरावती जिले के परतवाड़ा में अश्लील वीडियो मामले की जांच के लिए बुधवार को पुलिस अधीक्षक विशाल आनंद ने 47 लोगों की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की है। पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि जब तक इस अश्लील वीडियो मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन पुलिसकर्मियों को अन्य काम नहीं सौपा जाएगा।
अमरावती पुलिस अधीक्षक विशाल आनंद ने बताया कि अश्लील वीडियो और फोटो वायरल मामले की जांच के लिए गठित की गई एसआईटी सहायक पुलिस अधीक्षक शुभम कुमार के नेतृत्व में काम करेगी। इस टीम में साइबर सेल, लोकल क्राइम ब्रांच और अलग-अलग पुलिस स्टेशनों के एक्सपर्ट स्टाफ शामिल हैं। इसमें तीन पुलिस इंस्पेक्टर, चार असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर और तीन पुलिस सब-इंस्पेक्टर शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक ने साफ आदेश दिया है कि जब तक इस केस की जांच पूरी नहीं हो जाती, इस टीम के किसी भी कर्मचारी को कोई दूसरा काम नहीं दिया जाएगा। जो भी अश्लील वीडियो बनाता है, उनमें शामिल होता है और उन्हें वायरल करके पीड़ितों की इज्जत से खेलता है, अब उन सभी को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
इस मामले की छानबीन कर रहे पुलिस अधिकारी ने बताया कि इन वीडियो का कथित तौर पर ब्लैकमेल के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया और इन्हें वायरल करने की धमकियां दी गईं। इनमें से कई वीडियो ऑनलाइन सर्कुलेट किए गए। अब तक छानबीन में पता चला है कि लगभग 350 वीडियो सर्कुलेट किए गए, जबकि पीड़ितों की संख्या 180 से ज्यादा हो सकती है। हालांकि, अभी तक वीडियो सबूतों और स्क्रीनशॉट के आधार पर केवल सात पीड़ितों की ही आधिकारिक तौर पर पुष्टि हो पाई है। इस मामले में अब तक मुख्य आरोपित समेत छह आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की छानबीन की जा रही है।
राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने बुधवार को बताया कि उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और मामले को नजरअंदाज करने वाले पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग की है। बोंडे ने कहा कि इस मामले में लगभग 180 पीड़ित हैं, जिनमें से ज्यादातर हिंदू हैं। कुछ पीड़ित मुस्लिम भी हैं। कुछ पीड़ित नाबालिग हैं इसलिए मामले की गहन छानबीन की जानी चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव