Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

सीवान, 15 अप्रैल (हि.स.)। सीवान जिले में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत मातृ देखभाल समन्वय पायलट परियोजना पर एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला सिविल सर्जन श्रीनिवास प्रसाद के नेतृत्व में आयोजित हुई, जबकि कार्यक्रम का संचालन जिला कार्यक्रम प्रबंधक विशाल कुमार द्वारा किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, स्वास्थ्यकर्मियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और गर्भवती महिलाओं को समय पर एवं समुचित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, ब्लॉक सामुदायिक प्रबंधक, आशा फैसिलिटेटर, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी सहित ‘भव्या’ के जिला समन्वयक ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने जमीनी स्तर के अनुभव साझा करते हुए मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में आने वाली चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की। इस संवाद से समस्याओं की पहचान के साथ-साथ उनके व्यावहारिक समाधान भी सामने आए। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि बेहतर समन्वय, नियमित निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई से ही मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाया जा सकता है।
यह पायलट परियोजना फिलहाल जिले के गोरेयाकोठी, दारौंदा और सीवान सदर प्रखंडों में संचालित की जा रही है। इन क्षेत्रों का चयन मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों के आधार पर किया गया है, ताकि लक्षित हस्तक्षेप के माध्यम से बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकें।
कार्यशाला में गर्भवती महिलाओं के समय पर पंजीकरण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया, जिससे प्रारंभिक अवस्था से ही उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित हो सके। साथ ही, उच्च जोखिम गर्भावस्था की समय पर पहचान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि जोखिम वाली गर्भावस्थाओं को समय रहते चिन्हित कर लिया जाए, तो जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है और मातृ मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है।
इसके अलावा, नियमित प्रसव पूर्व जांच को अनिवार्य बताते हुए निर्देश दिया गया कि प्रत्येक गर्भवती महिला की कम से कम चार जांच सुनिश्चित की जाए। आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त जांच भी कराई जाए, ताकि किसी भी संभावित खतरे का समय रहते पता चल सके।
कार्यशाला में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि सभी गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में प्रसव के लिए प्रेरित किया जाए, जिससे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में सुरक्षित प्रसव संभव हो सके। साथ ही, प्रसव के बाद की देखभाल को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया गया, जिससे मां और नवजात दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma