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पटना, 15 अप्रैल (हि.स.)। बिहार की सियासत में सम्राट चौधरी का उभार अब सिर्फ राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि ज्याेतिषीय दुनिया में चर्चा का केंद्र बन चुका है। एक ओर जहां ज्योतिषीय गणनाएं उनके सितारों को बुलंद बता रही हैं, वहीं दूसरी ओर उनका तेज राजनीतिक उत्थान फर्श से अर्श तक की कहानी के रूप में देखा जा रहा है।
ज्योतिषाचार्य एवं काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के पूर्व ट्रस्टी पं. प्रसाद दीक्षित का ज्योतिषीय आंकलन के जरिए पूर्व में ही दावा किया था कि सम्राट चौधरी की कुंडली में ग्रहों का ऐसा संयोग बना, जिसने उन्हें लगातार आगे बढ़ायेगा। मंगल की आक्रामकता, गुरु का विस्तार और चंद्रमा की स्थिरता- इन सबका मेल उन्हें नेतृत्व की ऊंचाई तक ले जाने वाला है। उनकी मानें ताे यह वही ग्रहों का योग है, जिसने उन्हें संगठन की भीड़ से निकालकर सत्ता के शिखर तक पहुंचाया है।
लेकिन, सियासत के जानकार लव कुमार मिश्र इस कहानी को सिर्फ ग्रहों तक सीमित नहीं मानते। उनका साफ कहना है कि भारतीय जनता पार्टी में उनकी मजबूत पकड़, ओबीसी समीकरण पर सटीक दांव और आक्रामक राजनीतिक शैली ने उन्हें तेजी से आगे बढ़ाया। यानी, जहां एक ओर ग्रहों का खेल चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर ग्राउंड की पॉलिटिक्स ने असली जमीन तैयार की।
फिलहाल, सम्राट चौधरी का उभार दो समानांतर कहानियां बयां कर रहा है। एक आसमान में लिखी किस्मत की और दूसरी जमीन पर गढ़ी गई सियासी रणनीति की। अब नजर इस बात पर है कि यह चमक सिर्फ चर्चा तक सीमित रहती है या बिहार की सत्ता में स्थायी छाप छोड़ती है। सवाल है कि वे बिहार की राजनीति को कितनी दूर तक ले जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश