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सहरसा, 10 अप्रैल (हि.स.)। अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन के प्रदेश महामंत्री संगठन प्रभारी पूर्णिया, कोशी एवं भागलपुर प्रमंडल के अनिल कुमार साहा ने सभी जिला पदाधिकारी के निर्देश के बाद भी जिले के निजी स्कूलों द्वारा मनमानी शुल्क ट्यूशन फीस सहित स्कूल द्वारा अधिकृत पुस्तक दुकानों से पुस्तकें, कॉपियां व स्कूल ड्रेश खरीदना बंद नहीं हुआ है। साथ ही अब भी निजी स्कूलों द्वारा रीएडमिशन पुनः नामांकन के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है के विषय पर बिहार सरकार के शिक्षा विभाग से निजी स्कूलों द्वारा अवैध शुल्क वसूली एवं अन्य कार्यक्रमों पर रोक लगाने का गुहार लगाई है। हालांकि जिले में निजी विद्यालयों द्वारा मनमानी शुल्क वसूली और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जिले के सभी निजी स्कूलों के निर्देशकों की बैठक कर रीएडमिशन के नाम पर मनमाने वसुली नहीं करने का सख्त निर्देश दिया था। उसके बाद भी शहर के सभी निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस व रीएडमिशन जारी है।
कुछ लोगों ने पूर्णिया जिला पदाधिकारी द्वारा दिए गए निजी स्कूलों को निर्देश का स्वागत करते हुए कहा है कि अगर जिला प्रशासन चाहे तो निजी स्कूलों की मनमानी बन्द कर सकती है। लेकिन निजी स्कूलों की मनमानी जारी है। जिले में रजिस्टर्ड निजी विद्यालय मे से एक-दो को छोड़ अधिकांश सीबीएसई से मान्यता प्राप्त विद्यालय संचालित हैं। विभिन्न माध्यमों से मिल रही शिकायतों में यह सामने आया है कि कई स्कूल प्रवेश शुल्क, विकास शुल्क, वार्षिक शुल्क, सत्र शुल्क, अवधि शुल्क और ए०सी० शुल्क,कम्प्यूटर शुल्क,खेल शुल्क जैसे विभिन्न मदों के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूल रहे थे। इसके अलावा अभिभावकों को यूनिफॉर्म, किताबें और कॉपियां केवल स्कूल द्वारा अधिकृत दुकानों से खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य किया जाता है। अगर एक वर्ग में एक साथ दो छात्र पढ़ते हैं तो उसे भी अगल-अलग किताब का सेट खरीदना पड़ता है। प्रत्यक वर्ष स्कूलों द्वारा कुछ ना कुछ किताब में हेरफेर कर दिया जाता है जिसकारण बड़े भाई-बहनों की पुरानी किताबों का उपयोग नहीं किया जा सकता है। जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक खर्च बढ़ता ही जा रहा है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत नामांकित आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को भी कई बड़े स्कूलों में नहीं पढ़ाया जाता है। वहीं जिले में अधिकांश मिशनरी स्कूलों की मनमानी और भी चरम पर है। मिशनरी स्कूलों में अभिभावकों की एक नहीं सुनी जाती है।
हिन्दुस्थान समाचार / अजय कुमार