हिसार : गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय के वूमेन सेल ने शुरू की कार्यक्रमों की श्रृंखला
प्रेरणादायक फिल्म ‘गुंजन सक्सेना: दा कारगिल गर्ल’ पर चर्चा का हुआ आयोजन हिसार, 09 मार्च (हि.स.)। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की वूमेन सेल, एनएसएस यूनिट और यूएलसी के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय महिला
प्रेरणादायक फिल्म ‘गुंजन सक्सेना: दा कारगिल गर्ल’ देखने वाले अतिथिगण एवं शोधार्थी।


प्रेरणादायक फिल्म ‘गुंजन सक्सेना: दा कारगिल

गर्ल’ पर चर्चा का हुआ आयोजन

हिसार, 09 मार्च (हि.स.)। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान

एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की वूमेन सेल, एनएसएस यूनिट और यूएलसी के सहयोग से

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में 9 से 11 मार्च ‘सलाम नारी को’ शीर्षक से विभिन्न

कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इसी क्रम में सोमवार को वूमेन सेल द्वारा

प्रेरणादायक फिल्म ‘गुंजन सक्सेना: दा कारगिल गर्ल’ पर चर्चा का आयोजन किया गया।

वूमेन सेल की अध्यक्षा प्रो. दीपा मंगला ने बताया

कि सीआरएस सभागार के सेमिनार हॉल-2 में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न

विभागों से 150 से अधिक शोधार्थियों ने भाग लिया। यह फिल्म गुंजन सक्सेना के जीवन पर

आधारित है, जो भारतीय वायु सेना की पहली महिला पायलटों में से एक थी और जिन्होंने

1999 के कारगिल युद्ध के दौरान अपनी सेवाएं दी। फिल्म में एक ऐसी युवती की प्रेरणादायक

यात्रा को दर्शाया गया है, जो बचपन से ही उड़ान भरने का सपना देखती है और अंततः पायलट

बनकर पुरुष-प्रधान वातावरण में आने वाली चुनौतियों और भेदभाव को पार करती है।

कार्यक्रम के दौरान फिल्म के कुछ अंश दिखाए गए,

जिसके बाद शोधार्थियों के बीच एक विचारोत्तेजक चर्चा हुई। इस चर्चा में प्रतिभागियों

ने फिल्म में दिखाए गए लैंगिक रूढ़िवाद (जेंडर स्टिरियोटाइप्स) और उनके आज के पेशेवर

परिवेश में प्रभाव पर विचार व्यक्त किए। शोधार्थियों ने बताया कि फिल्म में नायिका

को अपने साथियों और वरिष्ठों के संदेह और पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ता है, जो इस

धारणा को दर्शाता है कि कुछ पेशे केवल पुरुषों के लिए ही उपयुक्त माने जाते हैं। फिल्म

इस सोच को चुनौती देते हुए यह सशक्त संदेश देती है कि ‘हवाई जहाज जेंडर नहीं पहचानते’ अर्थात प्रतिभा और

क्षमता का लिंग से कोई संबंध नहीं होता।

चर्चा के दौरान शोधार्थियों ने आत्मविश्वास,

दृढ़ संकल्प, लगन, साहस और कठिन परिस्थितियों में धैर्य जैसे नैतिक मूल्यों पर भी प्रकाश

डाला, जो गुंजन सक्सेना के जीवन से प्रेरित हैं। उनका संवाद “मुझे सिर्फ उड़ना है” उनके अटूट जुनून और

अपने सपनों को साकार करने की दृढ़ इच्छा का प्रतीक है। प्रतिभागियों ने यह भी चर्चा

की कि फिल्म यह संदेश देती है कि सच्ची देशभक्ति केवल नारों तक सीमित नहीं होती, बल्कि

अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार और समर्पित रहने में निहित होती है।

इसके साथ ही सहयोगी मार्गदर्शन और पारिवारिक

समर्थन की भूमिका पर भी जोर दिया गया। ऐसे समर्थन से व्यक्ति सामाजिक बाधाओं को पार

कर पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर अपने सपनों को साकार कर सकता है। चर्चा के अंत में

यह निष्कर्ष निकला कि गुंजन सक्सेना की कहानी युवा महिलाओं के लिए एक सशक्त प्रेरणा

है, जो उन्हें रूढ़ियों को तोड़ने, अपनी क्षमताओं पर विश्वास करने और साहस व आत्मविश्वास

के साथ अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करती है। कार्यक्रम के दौरान प्रो.

अंजू वर्मा, प्रो. उब्बा सविता, डॉ. तरुणा, प्रो. श्वेता सिंह, प्रो. हिमानी, डॉ. सुनीता

तथा डॉ. वंदना सिंह भी उपस्थित रही।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर