हिमाचल में निर्माण हुआ महंगा, अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र के लिए अब ज्यादा चुकानी होगी फीस
शिमला, 09 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में भवन और रियल एस्टेट परियोजनाओं में अतिरिक्त निर्माण करवाना अब महंगा हो गया है। राज्य सरकार ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग नियम-2014 में संशोधन करते हुए अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र यानी प्रीमियम फ्लोर एरिया रेशियो
हिमाचल में निर्माण हुआ महंगा, अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र के लिए अब ज्यादा चुकानी होगी फीस


शिमला, 09 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में भवन और रियल एस्टेट परियोजनाओं में अतिरिक्त निर्माण करवाना अब महंगा हो गया है। राज्य सरकार ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग नियम-2014 में संशोधन करते हुए अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र यानी प्रीमियम फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) लेने पर शुल्क तय कर दिया है। इस सम्बंध में जारी अधिसूचना के अनुसार सरकार ने “हिमाचल प्रदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (अठारहवां संशोधन) नियम, 2026” लागू किए हैं। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का मसौदा 6 जनवरी 2026 को जारी किया गया था और 15 जनवरी को इसे राजपत्र (ई-गजट) में प्रकाशित कर लोगों से 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे, लेकिन तय समय में कोई आपत्ति या सुझाव प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिनियम 1977 की धारा 87 के तहत यह संशोधन लागू कर दिया गया।

नए नियमों के तहत यदि कोई डेवलपर या मालिक अपनी रियल एस्टेट परियोजना में तय सीमा से अधिक निर्माण क्षेत्र लेना चाहता है तो उसे इसके लिए सरकार को प्रीमियम शुल्क देना होगा।

अधिसूचना के अनुसार यदि प्रीमियम एफएआर 0.25 तक लिया जाता है तो प्रति वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्र के लिए 3000 रुपये शुल्क देना होगा। वहीं 0.25 से अधिक और 0.50 तक प्रीमियम एफएआर लेने पर 5000 रुपये प्रति वर्ग मीटर तथा 0.50 से अधिक और 0.75 तक के लिए 7000 रुपये प्रति वर्ग मीटर शुल्क देना होगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह प्रावधान उन रियल एस्टेट परियोजनाओं पर लागू नहीं होगा जिनका निर्माण पूरा हो चुका है और जिन्हें पहले ही कम्प्लीशन सर्टिफिकेट मिल चुका है। जिन परियोजनाओं का निर्माण अभी चल रहा है या आंशिक रूप से पूरा हुआ है, उनमें भी उन ब्लॉकों या हिस्सों पर यह नियम लागू नहीं होगा जहां कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी हो चुका है, जबकि जिन हिस्सों में अभी निर्माण शुरू नहीं हुआ है वहां प्रीमियम एफएआर का विकल्प लिया जा सकेगा।

नई या प्रस्तावित परियोजनाओं में डेवलपर या मालिक प्रारंभिक विकास योजना के साथ अतिरिक्त एफएआर खरीद सकते हैं, लेकिन कुल निर्माण क्षेत्र निर्धारित सीमा के भीतर ही रहेगा और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग नियमों में तय ऊंचाई तथा अन्य शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि प्रीमियम एफएआर केवल एक सुविधा है, इसे किसी का अधिकार नहीं माना जाएगा और इसका इस्तेमाल किसी भी अवैध या अनधिकृत निर्माण को नियमित करने के लिए नहीं किया जा सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा