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बांकुड़ा, 08 मार्च (हि. स.)। रसोई गैस की लगातार बढ़ती कीमतों के खिलाफ अब ग्रामीण और शहरी इलाकों में भी विरोध के नए तरीके देखने को मिल रहे हैं। इसी कड़ी में रविवार को विष्णुपुर में महिलाओं और स्थानीय लोगों ने सड़क पर मिट्टी का चूल्हा जलाकर और थाली बजाकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने शहर के एक व्यस्त मोड़ पर इकट्ठा होकर मिट्टी का चूल्हा बनाया और सूखी पत्तियां तथा लकड़ी जलाकर खाना पकाने का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। वहीं रसोई गैस के सिलेंडर को पास में रखकर उस पर माला पहनाई गई, जिससे यह संदेश दिया गया कि महंगी गैस अब आम लोगों के लिए केवल ‘सजावट की वस्तु’ बनती जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान कई महिलाएं तृणमूल कांग्रेस का झंडा लेकर भी शामिल हुईं। उन्होंने गैस सिलेंडर पर लिखकर और पोस्टर दिखाकर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने नारे लगाए—“काके भोट देवो काका, गैसेर दाम हजार टका” और “गैस नहीं सोना है क्या?”
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना था कि रसोई गैस की कीमत हजार रुपये के पार पहुंचने से मध्यमवर्गीय और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारी श्यामली घोष ने कहा कि पहले एक सिलेंडर से पूरे महीने घर चल जाता था, लेकिन अब उसकी कीमत चुकाना मुश्किल हो गया है। अगर यही स्थिति रही तो लोगों को फिर से लकड़ी और पत्तों से खाना बनाने पर मजबूर होना पड़ेगा।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से गैस पर सब्सिडी बढ़ाने और कीमतें कम करने की मांग की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य विरोध और सभा के बजाय सड़क पर चूल्हा जलाकर विरोध करने से आम परिवारों की रसोई से जुड़ी परेशानी को सीधे तौर पर सामने लाने की कोशिश की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता