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अजमेर, 08 मार्च (हि.स.)। पुष्कर में रविवार को 43 दिवसीय शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ का भव्य शुभारंभ विशाल कलश यात्रा और शोभायात्रा के साथ हुआ। आयोजकों के अनुसार इसे कलयुग का पहला और पुष्कर के इतिहास का सबसे बड़ा महायज्ञ बताया जा रहा है।
शुभारंभ से पूर्व ब्रह्म घाट पर पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं सिर पर कलश लेकर शामिल हुईं।
शोभायात्रा में सुसज्जित बग्गी में महायज्ञ के मुख्य सूत्रधार स्वामी प्रखर महाराज सहित कई संत-महात्मा सवार रहे। इनमें विशोकानंद महाराज, हितेश्वरानंद, गुरुशरण और दयानंद भी शामिल थे।
शोभायात्रा में देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियां, तीन बैंड दल और ध्वजवाहक घुड़सवार विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। कलश यात्रा गऊ घाट, सदर बाजार, बद्री घाट, वराह चौक और महादेव चौक सहित विभिन्न मार्गों से होते हुए ब्रह्म सावित्री वेद विद्यापीठ स्थित यज्ञ स्थल पहुंची, जहां विधिवत कलश स्थापना की गई।
प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट और विप्र फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह महायज्ञ 19 अप्रैल तक चलेगा। इसके लिए 200 यज्ञकुंड बनाए गए हैं, जहां देशभर से आए 200 यजमान दंपति प्रतिदिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां देंगे। महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन लगभग 2000 विप्र साधक सामूहिक रूप से संध्या-वंदन करते हुए गायत्री मंत्र का जाप करेंगे। पूरे आयोजन में करीब 27 करोड़ गायत्री मंत्रों के जाप का संकल्प लिया गया है, जिसे विश्व शांति और मानव कल्याण को समर्पित किया गया है।
महायज्ञ के पहले दिन मुंडन, शिखा धारण और स्नान के बाद यज्ञोपवीत संस्कार के साथ प्रायश्चित कर्म और संकल्प की विधियां भी संपन्न कराई गईं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और साधु-संत इस आध्यात्मिक आयोजन में शामिल हुए।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित