नटरंग के ‘संडे थिएटर’ में मंचित हुआ व्यंग्यात्मक हिंदी नाटक ‘गिरगिट’
जम्मू, 08 मार्च (हि.स.)। जम्मू के रानी पार्क में आयोजित नटरंग की साप्ताहिक रंगमंच श्रृंखला ‘संडे थिएटर’ के अंतर्गत रविवार को हिंदी नाटक ‘गिरगिट’ का सफल मंचन किया गया। इस नाटक का निर्देशन रंगकर्मी नीरज कांत ने किया। यह प्रस्तुति प्रसिद्ध रूसी लेखक ए
नटरंग के ‘संडे थिएटर’ में मंचित हुआ व्यंग्यात्मक हिंदी नाटक ‘गिरगिट’


जम्मू, 08 मार्च (हि.स.)। जम्मू के रानी पार्क में आयोजित नटरंग की साप्ताहिक रंगमंच श्रृंखला ‘संडे थिएटर’ के अंतर्गत रविवार को हिंदी नाटक ‘गिरगिट’ का सफल मंचन किया गया। इस नाटक का निर्देशन रंगकर्मी नीरज कांत ने किया। यह प्रस्तुति प्रसिद्ध रूसी लेखक एंटोन चेखव की एक लघु कहानी पर आधारित है और वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत करती है। नाटक की रूपांतरण शैली को स्थानीय संदर्भों के साथ इस तरह जोड़ा गया कि दर्शकों को लगा मानो वे अपनी ही कहानी मंच पर देख रहे हों।

नाटक ‘गिरगिट’ की कहानी एक कुत्ते और एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो परिस्थितियों के अनुसार गिरगिट की तरह अपना रंग बदलता रहता है। नाटक की शुरुआत तब होती है जब एक कुत्ता एक जेबकतरे को काट लेता है और वह पुलिस से कुत्ते के मालिक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता है। इसी दौरान एक राहगीर संकेत देता है कि कुत्ता स्थानीय मंत्री का हो सकता है। यह सुनते ही पुलिस अधिकारी का रवैया बदल जाता है और वह जेबकतरे को ही दोषी ठहराने लगता है।

कहानी में लगातार मोड़ आते हैं, कभी कुत्ते को मंत्री का बताया जाता है, तो कभी उससे इंकार किया जाता है। अंततः जब मंत्री के घर का एक नौकर आता है और कुत्ते को मंत्री के भाई का बताता है, तब उसे पूरे ‘सरकारी प्रोटोकॉल’ के साथ वापस भेज दिया जाता है। यह घटनाक्रम सत्ता के प्रभाव और व्यवस्था की दोहरी मानसिकता को तीखे व्यंग्य के माध्यम से उजागर करता है। मंचन में मिहिर गुजराल ने पुलिस अधिकारी की भूमिका में प्रभावशाली अभिनय किया, जबकि आदेश धर ने उनके अधीनस्थ के रूप में उनका बेहतरीन साथ दिया। कननप्रीत कौर ने वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका में नौकरशाही की जटिलताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। अन्य कलाकारों में मोहम्मद यासीन, विशाल शर्मा, कुशल भट्ट, कार्तिक कुमार, अर्जुन शर्मा, लोविश और शीतल सेन ने भी अपने अभिनय से दर्शकों की सराहना प्राप्त की।

नटरंग की इस प्रस्तुति ने एक बार फिर यह साबित किया कि सामाजिक और राजनीतिक व्यंग्य को रंगमंच के माध्यम से प्रभावी ढंग से दर्शकों तक पहुंचाया जा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा