हिमाचल में मिड डे मील कर्मियों की 22 जून को प्रदेशव्यापी हड़ताल की घोषणा
शिमला, 08 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में मिड डे मील कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर 22 जून को प्रदेशव्यापी हड़ताल करने और शिमला में राज्य सचिवालय के बाहर बड़ा प्रदर्शन करने का फैसला किया है। मिड डे मील वर्कर्ज यूनियन (सीटू) की राज्य कमेटी की बैठक
हिमाचल में मिड डे मील कर्मियों की 22 जून को प्रदेशव्यापी हड़ताल की घोषणा


शिमला, 08 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में मिड डे मील कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर 22 जून को प्रदेशव्यापी हड़ताल करने और शिमला में राज्य सचिवालय के बाहर बड़ा प्रदर्शन करने का फैसला किया है। मिड डे मील वर्कर्ज यूनियन (सीटू) की राज्य कमेटी की बैठक रविवार को शिमला के कैथू स्थित किसान मजदूर भवन, चितकारा पार्क में हुई, जिसकी अध्यक्षता रीता देवी ने की।

बैठक में तय किया गया कि प्रदेश भर के हजारों मिड डे मील कर्मी 22 जून को हड़ताल करेंगे और सचिवालय छोटा शिमला के बाहर प्रदर्शन करेंगे।

बैठक को संबोधित करते हुए सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, उपाध्यक्ष जगत राम और यूनियन की महासचिव शांति देवी ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की कांग्रेस सरकार की नीतियां मिड डे मील कर्मियों के हित में नहीं हैं। उनका कहना था कि प्रदेश में करीब 21 हजार मिड डे मील कर्मी काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बनी हुई है।

नेताओं के अनुसार मिड डे मील कर्मियों के लिए केवल लगभग पांच हजार रुपये प्रतिमाह वेतन तय किया गया है और वह भी कई बार महीनों तक नहीं मिलता। उनका आरोप है कि राज्य और केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली हिस्सेदारी समय पर जारी नहीं होती, जिसके कारण मजदूरों को नियमित भुगतान नहीं हो पाता। कई महीनों तक वेतन न मिलने से उनके लिए परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है।

यूनियन नेताओं ने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने वर्ष 2019 में और डबल बेंच ने वर्ष 2024 में फैसला दिया था कि मिड डे मील कर्मियों को 10 महीने के बजाय 12 महीने का वेतन दिया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार ने अभी तक इस फैसले को लागू नहीं किया है और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिससे कर्मियों में नाराज़गी है।

बैठक में यह भी कहा गया कि मिड डे मील कर्मियों को पूरे साल में एक भी छुट्टी नहीं मिलती। यदि किसी आपात स्थिति, बीमारी या पारिवारिक कार्यक्रम के कारण छुट्टी लेनी पड़े तो उन्हें अपनी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को काम पर लगाना पड़ता है। इसके लिए 500 से 700 रुपये तक की दिहाड़ी उन्हें खुद देनी पड़ती है, जबकि उन्हें खुद अपने काम की केवल करीब 150 रुपये दिहाड़ी मिलती है।

यूनियन का कहना है कि कई स्कूलों में मिड डे मील कर्मियों से खाना बनाने के अलावा किचन गार्डन का काम, झाड़ियां काटना, सफाई करना और पानी की टंकियां साफ करवाने जैसे अतिरिक्त काम भी करवाए जाते हैं, जबकि इसके लिए कोई अलग भुगतान नहीं दिया जाता।

मिड डे मील वर्कर्ज यूनियन ने सरकार से मांग की है कि हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार उन्हें 12 महीने का वेतन दिया जाए, हर महीने की पहली तारीख को समय पर भुगतान किया जाए और वेतन की जानकारी के लिए उन्हें वेतन स्लिप दी जाए। इसके अलावा आंगनबाड़ी कर्मियों की तरह साल में कम से कम 20 छुट्टियां देने, साल में दो यूनिफॉर्म देने और महिला कर्मियों को रक्षाबंधन, करवाचौथ और भाई दूज पर वेतन सहित अवकाश देने की मांग भी की गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा