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खूंटी, 08 मार्च (हि.स.)। सिलादोन के कोलाद में रविवार को सरना धर्म सोतो: समिति की शाखा स्थापना दिवस सह सरना धर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मंगल सिंह मुंडा, मंगरा पहान और साधो मुंडा की अगुवाई में सरना स्थल पर भगवान सिंगबोंगा की पूजा-अर्चना से हुई। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
सभा को संबोधित करते हुए धर्मगुरु बुधराम सिंह मुंडा ने कहा कि सरना धर्म मानव सभ्यता के प्राचीनतम धर्मों में से एक है, जिसका अपना मत-सिद्धांत, पूजा-विधान, आदर्श और मूल्य हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में धार्मिक प्रतिस्पर्धा के कारण सरना धर्म अलग-थलग पड़ता नजर आ रहा है और समाज धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। समाज में धार्मिक अनुष्ठानों और रीति-रिवाजों में एकरूपता की कमी के कारण जातीयता और क्षेत्रीयता को लेकर आपसी मतभेद भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में समाज को इन सीमाओं से ऊपर उठकर सरना धर्म को संगठित करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर धर्मगुरु धिरजु मुंडा ने कहा कि झारखंड सरकार ने प्रकृति महापर्व सरहुल के लिए 21 मार्च को सरकारी अवकाश घोषित किया है, लेकिन जानकारी के अभाव में कई लोग इस दिन सरहुल नहीं मना पाते हैं। इससे छात्र-छात्राएं और नौकरीपेशा लोग अपने पारंपरिक पर्व-त्योहारों से वंचित हो जाते हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि 21 मार्च को अपने-अपने क्षेत्रों में हर्षोल्लास के साथ सरहुल पर्व मनाएं और दोपहर में गाजा-बाजा के साथ शोभायात्रा निकालकर समाज में एकता, प्रेम और भाईचारे का संदेश दें।
कार्यक्रम में लुथुड़ु मुंडा, पांडु मुंडा, चैतन मुंडा, किशुन राय मुंडा, बिरसा कंडीर, सुगना पहान, बिरसिंह ओड़ेआ और गोल्गा मुंडा सहित रांची, खूंटी, मुरहू, बंदगांव, अड़की और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में सरना धर्मावलंबी उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा