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तेहरान/वॉशिंगटन, 10 मार्च (हि.स.)। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिका और इजराइल पर उसके ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान के ऊर्जा भंडारों और ईंधन डिपो पर हुए हवाई हमले युद्ध के “खतरनाक नए चरण” की शुरुआत को दर्शाते हैं।
बघाई ने कहा कि ईंधन भंडारों को निशाना बनाए जाने से जहरीले पदार्थ और खतरनाक गैसें वातावरण में फैल सकती हैं, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है। उनके अनुसार इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और इन्हें युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है।
दूसरी ओर, इजराइली सेना के प्रवक्ता नादव शोशानी ने कहा कि जिन ईंधन डिपो को निशाना बनाया गया, उनका इस्तेमाल ईरान के सैन्य अभियानों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए किया जा रहा था। इसलिए उन्हें वैध सैन्य लक्ष्य माना गया।
वहीं अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान के ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाने की योजना नहीं बना रहा है। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि अमेरिका की ओर से ईरान के तेल या गैस उद्योग पर हमले की कोई योजना नहीं है और हाल के हमले इजराइल द्वारा किए गए हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईंधन भंडारण स्थलों पर हमलों के कारण तेहरान में वायु गुणवत्ता पर असर पड़ा है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह स्थिति अस्थायी है और इसे ईरान के लोगों की दीर्घकालिक समस्याओं से अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय