राष्ट्रपति मुर्मू का अपमान संविधान का अपमान: गौरव ने ममता बनर्जी पर हमला बोला
जम्मू, 08 मार्च (हि.स.)। भाजपा प्रवक्ता और अंतरराष्ट्रीय मामलों के संयोजक गौरव गुप्ता ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार के आचरण की कड़ी निंदा करते हुए इसे संविधान और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा का
राष्ट्रपति मुर्मू का अपमान संविधान का अपमान: गौरव ने ममता बनर्जी पर हमला बोला


जम्मू, 08 मार्च (हि.स.)। भाजपा प्रवक्ता और अंतरराष्ट्रीय मामलों के संयोजक गौरव गुप्ता ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार के आचरण की कड़ी निंदा करते हुए इसे संविधान और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा का घोर अपमान बताया। एक कड़े बयान में गुप्ता ने कहा कि संथाल समुदाय से संबंधित कार्यक्रम को जिस तरह से बाधित किया गया और कार्यक्रम स्थल को कथित तौर पर बदला गया वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के अहंकार और संवैधानिक प्रोटोकॉल की पूर्ण अवहेलना को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जो स्वयं आदिवासी समुदाय से संबंध रखती हैं संथाल समुदाय के लोगों के साथ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आई थीं लेकिन कार्यक्रम के दौरान हुई घटनाएं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अपमानजनक थीं। गुप्ता ने कहा, “ममता बनर्जी सरकार द्वारा भारत की राष्ट्रपति के साथ किया गया व्यवहार मर्यादा की सभी सीमाओं को पार कर गया है।

यह न केवल राष्ट्रपति का अपमान है, बल्कि भारत के संविधान का भी अपमान है।” उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी का अराजक 'जंगल राज' अब उस स्तर पर पहुंच गया है जहां भारत के राष्ट्रपति की गरिमा का भी सम्मान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने इस घटना को प्रोटोकॉल और लोकतांत्रिक मर्यादा के सभी स्थापित मानदंडों का उल्लंघन बताया। गुप्ता ने कहा कि इस घटना से पूरे देश के लोगों विशेषकर आदिवासी समुदाय, युवाओं और महिलाओं की भावनाएं आहत हुई हैं।

उन्होंने कांग्रेस, डीएमके और वामपंथी दलों सहित विपक्षी दलों की इस मामले पर चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, टीएमसी सरकार को भारत के राष्ट्रपति, आदिवासी समुदाय और पूरे देश से इतने उच्च संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने के प्रयास के लिए तुरंत माफी मांगनी चाहिए। गुप्ता ने आगे कहा कि राष्ट्रपति और संविधान का सम्मान करना अनिवार्य है और किसी राज्य सरकार का ऐसा आचरण संवैधानिक लोकतंत्र में अस्वीकार्य, अनुचित और अत्यंत निंदनीय है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता