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जम्मू, 08 मार्च (हि.स.)। रखबंधु में आयोजित सत्संग में साहिब बंदगी सद्गुरु साहिब जी ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए संगत को आत्मसंयम और सतर्कता का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के शरीर के भीतर ही कई बड़े दुश्मन बैठे हैं, इसलिए हमेशा जागरूक रहना आवश्यक है। उन्होंने समझाया कि जो व्यक्ति जीवन के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहता है, वह अचेत नहीं रह सकता। सद्गुरु साहिब जी ने कहा कि मनुष्य के भीतर काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकार लगातार अशांति पैदा करते हैं। जैसे कोई डॉक्टर मरीज के उपचार से पहले रोग की पहचान करता है, उसी प्रकार आध्यात्मिक मुक्ति के लिए मनुष्य को पहले अपने बंधनों को पहचानना होगा। जब तक इन विकारों को समझकर उनसे बचने का प्रयास नहीं किया जाएगा, तब तक सच्ची भक्ति संभव नहीं है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि इतिहास में कई ऋषि-मुनि भी विषय-विकारों से पूरी तरह बच नहीं पाए। उन्होंने पराशर और श्रृंगी ऋषि का उल्लेख करते हुए कहा कि कठोर तपस्या करने के बावजूद मन के विकारों से बचना आसान नहीं होता। इसलिए मनुष्य को इनसे सावधान रहना चाहिए और सद्गुरु द्वारा बताए गए नियमों का पालन करना चाहिए। सद्गुरु साहिब जी ने कहा कि आत्मा स्वभाव से निर्मल है, लेकिन शरीर के भीतर विभिन्न विकारों का खेल चलता रहता है। ये विकार मनुष्य की अपनी शक्ति से ही सक्रिय रहते हैं और यदि व्यक्ति विवेक से काम ले तो वह अपने मन को नियंत्रित कर सकता है। उन्होंने कहा कि सद्गुरु ने सत्य नाम रूपी दवा दे दी है, लेकिन उसके साथ बताए गए नियमों और परहेज का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है।
अपने प्रवचनों के अंत में उन्होंने संगत को प्रेरित किया कि वे पाप कर्मों से दूर रहकर सत्संग, नाम-स्मरण और सद्गुरु की शिक्षाओं के मार्ग पर चलें। उन्होंने कहा कि सद्गुरु के नाम की शक्ति ही मनुष्य को इन आंतरिक दुश्मनों से बचाकर सच्चे आध्यात्मिक मार्ग की ओर ले जा सकती है।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा