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अयोध्या, 08 मार्च (हि.स.)। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अयोध्या महानगर में साकेत महाविद्यालय के सभागार में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र सम्पर्क प्रमुख पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र मनोज ने कहा कि एकत्व की भावना ही हिन्दुत्व है। सर्वत्र ईश्वर का दर्शन ही सनातन भारत का दर्शन है। हिन्दू सर्वे भवंतु सुखिन: की कामना करता है, जबकि अन्य देश सिर्फ अपनी ही भलाई चाहते हैं। इसलिए संगठित हिन्दू समाज ही पूरे विश्व को दिशा दे सकता है।
उन्होंने संघ शताब्दी वर्ष के विषय में विस्तार पूर्वक बताया और संगठन द्वारा किए जा रहे सभी प्रकार के कार्यों की चर्चा की। उन्होंने संघ के 100 वर्ष की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि किसी भी संगठन के लिए शताब्दी वर्ष महत्वपूर्ण बात है। आज संघ की समाज में स्वीकार्यता बढ़ी है, लेकिन संगठन को सभी लोग निकटता और गहराई से समझें, इसलिए शताब्दी वर्ष में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संघ की व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की कार्यपद्धति पर आज जर्मनी, रूस सहित 50 देश शोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत प्राचीनकाल से ही विश्व का समृद्ध देश रहा है, जो दुनिया भर में ज्ञान के अलावा वस्तुओं का निर्यात करता था। इसका उल्लेख विदेशी लेखकों ने भी किया है। फिर भी हमारे देश को पराधीन होना पड़ा। इसका चिंतन करते हुए डॉ. हेडगेवार निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि समाज के बिखराव के कारण ही आक्रांताओं ने हम पर शासन किया। समाज को संगठित करने के लिए उन्होंने 1925 में संघ की स्थापना की। प्रारम्भिक दौर में उपेक्षा और मिथ्या आरोप लगाकर तीन बार प्रतिबंध लगा संगठन की छवि धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया गया। इसके बावजूद संघ मजबूती से आगे बढ़ा।
उन्होंने कहा कि धर्म रिलीजन नहीं, यह कर्तव्य है। इसलिए लोगों को माता-पिता सहित समाज और राष्ट्र के प्रति भी अपने कर्तव्य का निर्वहन ईमानदारी से करना चाहिए। समाज से संगठित होकर देशहित में कार्य करने का आह्वान किया।
हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय