श्रीमंत शंकरदेव कला क्षेत्र में 'प्रज्ञा' का 'बौद्धिक नेतृत्व सम्मेलन' आयोजित
-चुनाव पूर्व संबंधित प्रश्नों का विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट व्यक्तियों ने दिए उत्तर गुवाहाटी, 08 मार्च (हि.स.)। असम विधानसभा चुनाव 2026 में किसे वोट देना चाहिए, क्यों वोट देना चाहिए, किन-किन कारकों के आधार पर मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए, चुना
गुवाहाटीः श्रीमंत शंकरदेव कला क्षेत्र में आयोजित 'प्रज्ञा' का 'बौद्धिक नेतृत्व सम्मेलन' की तस्वीर


-चुनाव पूर्व संबंधित प्रश्नों का विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट व्यक्तियों ने दिए उत्तर

गुवाहाटी, 08 मार्च (हि.स.)। असम विधानसभा चुनाव 2026 में किसे वोट देना चाहिए, क्यों वोट देना चाहिए, किन-किन कारकों के आधार पर मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए, चुनाव से पहले मन में उत्पन्न होने वाले इन प्रश्नों के साथ आज 'प्रज्ञा' के आयोजन में 'बौद्धिक नेतृत्व सम्मेलन' आयोजित हुआ। श्रीमंत शंकरदेव कला क्षेत्र के डॉ बाणीकांत काकति प्रेक्षागृह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट व प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने मताधिकार के प्रयोग की दिशा में एक स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। डॉ अरूपज्योति चौधुरी के संचालन में आयोजित बैठक में राज्य के धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, प्रशासनिक आदि विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट व्यक्तियों ने भाग लिया।

हाल के असम की जनसंख्या संरचना में बदलाव की चिंताजनक स्थिति के साथ-साथ असम की वर्तमान समग्र स्थिति में आम लोगों को जो कुछ निर्णय लेने होते हैं, उनपर बैठक में चर्चा हुई। आगामी विधानसभा चुनाव के ठीक पहले ये निर्णय यह तय करने में मदद करते हैं कि 'किसे वोट दें', और यह सवाल बुद्धिमानी के दृष्टिकोण से उठाए गए बिंदुओं और मुद्दों में शामिल हैं। आम तौर पर चुनाव से विशेष रूप से संबंधित नहीं होने वाला एक महत्वपूर्ण मुद्दा असम की प्रकृति संरक्षण का है। ऐसे राजनीतिक दल को वोट देना चाहिए जो असम के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्राथमिकता देता हो।

वहीं दूसरी ओर असम के युवा शक्ति के विकास के लिए मादक पदार्थों के खिलाफ मजबूत स्थिति लेने के मामले में राजनीतिक दल की स्पष्ट नीति होनी चाहिए। तीसरे, असम विरोधी, घुसपैठ विरोधी नकारात्मक शक्तियों के प्रचार के खिलाफ समाज को सचेत रहना चाहिए। चौथे, असम की घुसपैठियों की भूमि तथा सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने का मुद्दा प्राथमिकता पाने योग्य है, इस पर ठोस चर्चा होनी चाहिए। एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि असम को फिर से हत्या-हिंसा-रोकथाम के माहौल में लौटना न पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए जनता को उचित राजनीतिक दल चुनना, आत्मनिर्भर बनना, स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करना, जैविक कृषि के प्रसार के लिए राजनीतिक नेता के दृष्टिकोण को चुनाव के समय जनता को स्पष्ट रूप से जानना आवश्यक है, ऐसा विभिन्न लोगों का मानना है।

साथ ही सभी के लिए शिक्षा की उपलब्धता के विषय को केवल एक नारे तक सीमित न रखते हुए, शिक्षा को सभी स्तरों के आम लोगों के लिए उपलब्ध कराने के लिए निजी शिक्षा के व्यवसायिक नियंत्रण की आवश्यकता पर भी जोर दिया जाता है। मतदान के प्रति अनिच्छा और वोट बर्बाद करने की प्रवृत्ति के खिलाफ जागरूकता पैदा करने पर जोर देते हुए नोटा में वोट डालकर यह सुनिश्चित करना कि खिलंज़िया (स्थानीय) का वोट बर्बाद न हो, इस पर सभा में जोर दिया गया।

आज की चर्चा की शुरुआत करते हुए नृत्याचार्य, पद्म भूषण जतिनेंद्रनाथ गोस्वामी ने 'प्रज्ञा' द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव और निर्णयों के प्रति समर्थन व्यक्त किया और साथ ही कहा, “सत्र न होता तो सत्रीया संस्कृति नहीं होती, सत्रीया समाज नहीं होता इस बात को लेकर दुख व्यक्त किया। जनसंख्या के परिवर्तन से सत्रीया समाज को बहुत नुकसान हुआ।” ऐसा सत्रीया नृत्य के पुरोधा ने चुनाव के समय इस संवेदनशील विषय पर ध्यान देने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।

प्रख्यात साहित्यकार अनुराधा शर्मा पुजारी ने भी जनसंख्या संरचना में बदलाव और जनसंख्या नियंत्रण की आवश्यकता पर टिप्पणी की। प्रख्यात साहित्यकार ने चिंता व्यक्त की कि जनसंख्या संरचना में बदलाव भाषा-साहित्य को नुकसान पहुंचा सकता है। उत्तर कमलाबारी सत्र के सत्राध्यक्ष जानार्दन देव गोस्वामी ने भी खिलंजिया, असमिया समाज में कार्यशीलता में कमी को लेकर चिंता व्यक्त की और इस क्षेत्र में उचित व्यवस्था अपनाने पर जोर दिया। संबोधन के संदर्भ में सत्राध्यक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा- राजा घर, प्रजा घर और गुरु घर यदि एकत्र नहीं होंगे तो समाज आगे नहीं बढ़ सकता। असम प्रकाशन परिषद के उपाध्यक्ष सुमंत चालिहा भी राजनीति को अपंगता और अपारग्यता मानने की मानसिकता को त्यागने पर जोर दिया।

‘प्रज्ञा’ द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव और निर्णय के आधार पर 2016 के पूर्व और 2016 के पश्चात के समयावधि का तुलनात्मक विश्लेषण करने का आह्वान किया गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के असम क्षेत्र के प्रचारक बशिष्ठ बुजारबरूवा ने ‘प्रज्ञा’ के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि राजनीतिक क्षेत्र को सही दिशा में ले जाने की जिम्मेदारी धार्मिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक, शैक्षिक आदि गैर-राजनीतिक क्षेत्रों की है। सम्मेलन में भाग लेते हुए पूर्व उपाचार्य अमलेन्दु चक्रवर्ती ने उल्लेख किया कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा ही वर्तमान समाज को सही दिशा में ले जा सकती है और इस क्षेत्र में जिस राजनीतिक पार्टी ने महत्व दिया है, ऐसी राजनीतिक पार्टी को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

पूर्व प्रोफेसर नीलिमा भागवती भी शिक्षा और स्वास्थ्य को महत्व देने के साथ-साथ महिला और समाज की सुरक्षा के विषय पर विचार करने के लिए आग्रह किया। प्रतिष्ठित मूर्तिकार बिरेन सिंह समाज को कार्यप्रधान बनाने के मामले में आगे बढ़ने के लिए आग्रह किया। चुनाव में किसे वोट देना है, इसे लेकर किसी को स्टेनोग्राफ़ी करने या निर्देश देने का अधिकार नहीं है, हालांकि किस विषय पर दल या नेता का चुनाव करना है, इस पर चर्चा करने की आवश्यकता है, ऐसा उल्लेख करते हुए विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने इस सम्मेलन में अपने विचार रखे।

आज की बैठक में एकशरण भागवती समाज के अध्यक्ष प्रताप मेधी, श्रीश्री भोगपुर सत्र के सत्राधिकारी दत्तदेव गोस्वामी, विशिष्ट वक्ता विजन महाजन, श्रीश्री बेलगुरी सत्र के सत्राधिकारी मुनिंद्र नारायण गोस्वामी, असम देवालय संघ के अध्यक्ष सुरेश चंद्र भट्टाचार्य सहित बड़ी संख्या में विशिष्ट व्यक्तियों ने भाग लेकर अपने विचार व्यक्त किए।

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय