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मुंबई, 06 मार्च (हि.स.)। शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार की ओर से घोषित किसानों की कर्जमाफी सिर्फ धोखा है। इस घोषणा में पात्र और अपात्र किसानों की शर्त डाली गई है इसलिए इस घोषणा से किसानों को कुछ हासिल नहीं होगा।
उद्धव ठाकरे आज विधान भवन में बजट पेश होने के बाद पत्रकारों से कहा कि यह बजट कर्ज लेकर पटाखा बजाने जैसा है। मुख्यमंत्री ने किसानों की कर्जमाफी का ऐलान किया, जबकि इसके लिए पैसे कहां से आएंगे, इसका उल्लेख नहीं है। साथ ही यह कर्जमाफी कब तक पूरी होगी, इसका भी उल्लेख नहीं किया गया है।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि फडणवीस सरकार की 2017 की छत्रपति शिवाजी महाराज लोन माफ़ी स्कीम अभी भी चल रही है। उस योजना से किसी भी किसान का भला नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि हमने कर्जमाफी की योजना टाइम-बाउंड तरीके से लागू की थी, जिसका लाभ किसानों को हुआ था।
उन्होंने कहा कि बजट में सिर्फ़ बड़े-बड़े आंकड़े और खोखले वादे हैं। सरकार ने राज्य पर कर्ज़ का पहाड़ लाद दिया है और 40,000 करोड़ रुपये के घाटे वाला यह बजट महाराष्ट्र को दीवालियापन की ओर ले जा रहा है। बजट में बुलेट ट्रेन, मेट्रो, सब-वे का बोलबाला है। गांवों के गरीबों, आदिवासियों, मेहनतकश लोगों, महिलाओं, बेरोजग़ारों और युवाओं के लिए बजट में कोई जगह नहीं है। कुल मिलाकर, यह बजट कुछ शहरों और कुछ लोगों के लिए है।
आम आदमी को बजट से कुछ नहीं मिलेगा: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि इस बजट में आम आदमी के लिए कुछ नहीं है। 2047 तक विकसित महाराष्ट्र और 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का विचार दिवास्वप्न है। पिछले कुछ सालों में भाजपा गठबंधन सरकार बजट की घोषणा करती है और फिर हर अगले सत्र में करोड़ों रुपये की सप्लीमेंट्री मांगें पेश करती है। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट से पता चला है कि राज्य दिवालियापन की ओर बढ़ रहा है। राज्य पर कर्ज और लोन गारंटी सहित लगभग 12 लाख करोड़ रुपये का बोझ है। 65 हजार करोड़ रुपये लोन की किस्तों के रूप में चुकाने हैं। इस वजह से बजट में आंकड़ों और जमीन पर असल स्थिति के बीच बहुत बड़ा अंतर है। पिछले बजट प्रस्ताव में अनुसूचित जातियों की योजनाओं के लिए 22 हजार 658 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था लेकिन असल में केवल 6 हजार 200 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए। पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और आदिवासियों की योजनाओं के लिए बजट में बड़े आंकड़े घोषित किए जाते हैं लेकिन उन्हें असल में खर्च नहीं किया जाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव