भारत विश्व का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक, उपभोक्ता तथा निर्यातक देश
अजमेर, 6 मार्च (हि.स.)। भारत विश्व का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक, उपभोक्ता तथा निर्यातक देश है। वर्तमान में देश में लगभग 44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मसालों की खेती होती है तथा 111.55 लाख टन उत्पादन के साथ इसका वार्षिक मूल्य लगभग 37,000-40,000 करोड़ रुपय
India is the world's largest producer, consumer and exporter of spices.


अजमेर, 6 मार्च (हि.स.)। भारत विश्व का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक, उपभोक्ता तथा निर्यातक देश है। वर्तमान में देश में लगभग 44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मसालों की खेती होती है तथा 111.55 लाख टन उत्पादन के साथ इसका वार्षिक मूल्य लगभग 37,000-40,000 करोड़ रुपये है। वैश्विक स्तर पर भारत का 48 प्रतिशत उत्पादन एवं 43 प्रतिशत मूल्य हिस्सेदारी है। देश से 160 से अधिक देशों में 15-18 लाख टन मसालों का निर्यात होता है। इस क्षेत्र से लगभग 1.9 करोड़ किसान परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। पिछले दो दशकों में मसाला क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसमें उत्पादन में 186 प्रतिशत, क्षेत्रफल में 86 प्रतिशत तथा उत्पादकता में 54 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।

यह जानकारी राजस्थान के अजमेर जिले के तबीजी क्षेत्र स्थित केन्द्रीय बीजीय मसाला एवं अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. विनय भारद्वाज ने संस्थान के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित रजत जयंती संबंधी गतिविधियों की जानकारी देते हुए मीडिया को दी।

भारद्वाज ने बताया कि भविष्य की रणनीति में जीनोमिक्स आधारित प्रजनन, जीन संपादन (सीआरआईएसपीआर), जीनोमिक चयन, डिजिटल कृषि, ब्लॉक चेन ट्रेसबिलिटी, आईओटी आधारित निगरानी, जैविक खेती तथा जलवायु- सहिष्णु किस्मों का विकास शामिल है।

वर्ष 2030 तक 10 बिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गुणवत्ता प्रमाणन, प्रसंस्करण अवसंरचना, नए बाजारों का विस्तार तथा डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ना आवश्यक होगा।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत का मसाला निर्यात लगभग 1.53 मिलियन टन (4.18 बिलियन डॉलर) है। यह वैश्विक निर्यात में 17.2 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। भविष्य में इसके 2030 तक 6.71 बिलियन डॉलर तथा 2047 तक 22.95 बिलियन डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग, न्यूट्रास्यूटिकल बाजार का विस्तार, एथनिक व्यंजनों की लोकप्रियता तथा मूल्य संवर्धित उत्पादों की बढ़ती हिस्सेदारी इस वृद्धि के प्रमुख कारक हैं। मसाले बागवानी फसलों में निर्यात आय के मामले में प्रथम तथा सभी कृषि वस्तुओं में चौथे स्थान पर हैं। इससे छोटे किसानों की आय बढ़ाने की बड़ी संभावनाएँ बनती हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत में बीजीय मसालों का लगभग 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है। वैश्विक उत्पादन में इनकी 60 प्रतिशत हिस्सेदारी है। निर्यात बाजार में भारत का लगभग 70 प्रतिशत प्रभुत्व है तथा मूल्य संवर्धित उत्पादों से लगभग 4,500 करोड़ का वार्षिक व्यवसाय होता है। हालांकि गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता अभी भी चुनौती है। इस क्षेत्र में लगभग 20,000 टन की आवश्यकता के मुकाबले केवल 30 प्रतिशत उपलब्धता है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र तबीजी अजमेर की स्थापना 19 जनवरी 2000 को हुई थी। आज संस्थान अपनी स्थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहा है। यह बीजीय मसाला फसलों के जर्मप्लाज्म संरक्षण, फसल सुधार, उत्पादन तकनीकों के विकास तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर कार्य करता है। केंद्र के पास लगभग 2400 जर्मप्लाज्म अभिगमनों का संग्रह है और यह राष्ट्रीय सक्रिय जर्मप्लाज्म स्थल के रूप में कार्य करता है। अब तक संस्थान द्वारा 26 उन्नत किस्में विकसित, 35 से अधिक तकनीकें व्यावसायिक रूप से हस्तांतरित, 30 टन से अधिक गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन, 2000 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इससे 5 लाख से अधिक किसानों को लाभ हुआ है। बीजीय मसालों में पाए जाने वाले जैव सक्रिय यौगिक जैसे मेथी में 4-हाइड्रॉक्सी-आइसोल्यूसिन, धनिया में डायोजेनिन, जीरा में क्यूमिनाल्डिहाइड, सौंफ में एनेथोल, कलौंजी में थायमोकिनोन, अजवाइन में थाइमोल तथा सोआ में डी-कार्वाेन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। ये यौगिक बीजीय मसालों को न्यूट्रास्यूटिकल एवं औषधीय उत्पादों के रूप में महत्वपूर्ण बनाते हैं।

उन्होंने बताया कि संस्थान ने जलवायु-सहिष्णु किस्मों का विकास किया है। इनमें सूखा सहनशील अजवाइन (एए-93), प्रारंभिक परिपक्व अजवाइन (एए-2), वर्षा आधारित अजवाइन-अजमोदा (एसीईएल-एक) स्टेम गॉल प्रतिरोधी धनिया (एसीआर-1), पाउडरी मिल्ड्यू प्रतिरोधी हरा धनिया (एजीसीआर-1) तथा ग्रीष्मकालीन मेथी (एएफजी- 4) प्रमुख हैं। इसके साथ ही सटीक कृषि तकनीक, ड्रिप फर्टिगेशन, प्लास्टिक मल्चिंग, उन्नत नर्सरी प्रबंधन तथा ट्रांसप्लांटिंग तकनीकें विकसित की गई हैं।

उन्होंने बताया कि सतत कीट प्रबंधन के लिए संस्थान ने वनस्पति आधारित कीटनाशक, नीम आधारित साबुन, करंज-गंधक अर्क, पाइंस रेजिन नैनो-इमल्शन तथा जैविक एंटोमोपैथोजन मिश्रण विकसित किए हैं। ये रासायनिक उपयोग को कम करते हुए कीट नियंत्रण में प्रभावी हैं। इसके अतिरिक्त संस्थान द्वारा विकसित मूल्य संवर्धित उत्पादों मसाला पाउडर, न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद, आवश्यक तेल एवं ओलियोरेजिन तथा कॉस्मेटिक उत्पाद से कच्चे मसालों की तुलना में लगभग 300 प्रतिशत तक अधिक मूल्य प्राप्त किया जा सकता है।

उल्‍लेखनीय है कि तबीजी स्थित केन्द्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र में इंडस्ट्री मीट एवं किसान मेले का आयोजन शनिवार 7 मार्च को प्रातः 9 बजे किया जाएगा। इसके साथ ही संस्थान के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रजत जयंती संबंधी गतिविधियां भी आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम में देशभर से लगभग 2000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। इनमें किसान, कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद, उद्योग प्रतिनिधि, विद्यार्थी तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारक शामिल होंगे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी उपस्थित रहेंगे। इसके अतिरिक्त कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग भारत सरकार के सचिव डॉ. मांगीलाल एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक भी कार्यक्रम में भाग लेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष