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देहरादून, 06 मार्च (हि.स.)। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी (सारा) की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक हुई। बैठक में विश्व बैंक पोषित जलागम विकास, जल निकायों के पुनर्जीवन, वृक्षारोपण, पारंपरिक नौलों-धारों के संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में देहरादून की सॉन्ग नदी और उत्तरकाशी की कमल नदी से संबंधित दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इसके साथ ही 23 अप्रैल 2025 को आयोजित सारा की पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया गया। मुख्य सचिव ने सॉन्ग नदी से जुड़े क्षेत्रों का विस्तृत चिन्हीकरण करने के निर्देश देते हुए कहा कि जिन स्थानों पर सुधार एवं हस्तक्षेप की आवश्यकता है, वहां चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को आवश्यक कार्यों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने को कहा। साथ ही परियोजना के क्रियान्वयन के बाद उसके प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन कराने के लिए आईआईटी रुड़की जैसे तकनीकी संस्थानों के सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने सारा की बैठकें नियमित अंतराल पर आयोजित करने और वाटर रिचार्ज, वनीकरण तथा पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण से जुड़े कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने सभी जनपदों को पौराणिक और पारंपरिक नौलों-धारों का चिन्हीकरण कर उनकी नैसर्गिक संरचना को सुरक्षित रखते हुए वैज्ञानिक तरीकों से आवश्यक उपचार करने को कहा, ताकि उनकी प्राकृतिकता बनी रहे और पारिस्थितिकी तंत्र पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसके अतिरिक्त उन्होंने वन क्षेत्रों में कैंपा फंड के माध्यम से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, सी. रविशंकर, अपर सचिव हिमांशु खुराना, अपूर्वा पांडेय, कहकशां नसी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय