शिवाजी जयंती दो विभिन्न दिनों में मनाने से जनता भ्रमित_डॉ प्रशांत
मुंबई,06 मार्च ( हि.स.) । छत्रपति शिवाजी महाराज महाराष्ट्र की पहचान और स्वाभिमान के हमेशा रहने वाले प्रतीक हैं। स्वराज्य की स्थापना करके उन्होंने दुनिया के सामने न्याय, स्वाभिमान और लोक कल्याण का आदर्श रखा। इसीलिए शिवाजी महाराज पूरे महाराष्ट्र ही
Shivaji jayanti for two days confused public


मुंबई,06 मार्च ( हि.स.) । छत्रपति शिवाजी महाराज महाराष्ट्र की पहचान और स्वाभिमान के हमेशा रहने वाले प्रतीक हैं। स्वराज्य की स्थापना करके उन्होंने दुनिया के सामने न्याय, स्वाभिमान और लोक कल्याण का आदर्श रखा। इसीलिए शिवाजी महाराज पूरे महाराष्ट्र ही नहीं अपितु पूरे भारत देश में आराध्य देवता माने जाते हैं। साथ ही उनकी अंतरराष्ट्रीय ख्याति है , ऐसे ऐतिहासिक महान विभूति की जयंती दो अलग-अलग दिन मनाना उनके चाहने वाले प्रशंसकों में भ्रम उत्पन्न कारण है जो कि किसी भी मायने में उचित नहीं है, इसलिए सरकार को इसे निर्धारित तारीख के हिसाब से मनाने का फैसला करना चाहिए, ऐसा पर्यावरणविद और वरिष्ठ पत्रकार डॉ. प्रशांत रवींद्र सिनकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखे एक पत्र में कहा है।

अभी, सरकार हर साल 19 फरवरी को छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाती है। लेकिन, हिंदू कैलेंडर के हिसाब से महाराज की जयंती फाल्गुन की तीसरी तारीख को होती है। इस साल यह तारीख 6 मार्च को पड़ी है। इसलिए, ऐसा लग रहा है कि महाराज की जयंती असल में दो अलग-अलग दिनों में मनाई जा रही है।

डॉ. सिनकर ने अपने बयान में कहा है कि भारतीय संस्कृति में कई संतों, महापुरुषों और देवताओं की जयंती तारीख के हिसाब से मनाने की परंपरा है। उस पृष्ठभूमि में, छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे युग बदलने वाले राजा की जयंती को लेकर एक जैसी परंपरा होना ज़रूरी है। दो अलग-अलग दिनों में जयंती मनाने से शिव भक्तों में कन्फ्यूजन होता है और कई लोगों की भावनाएं आहत होती हैं।

देश के इतिहास और संस्कृति में महाराष्ट्र में जन्मे छत्रपति शिवाजी महाराज का बहुत ऊंचा स्थान है। इसलिए, पूरे महाराष्ट्र में शिव प्रेमियों को लगता है कि उनकी जयंती को लेकर एक साफ और सम्मानजनक परंपरा बननी चाहिए। डॉ. प्रशांत सिनकर ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करे और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती तारीख के हिसाब से मनाने के बारे में कोई पॉजिटिव फैसला ले।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा