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बेंगलुरु, 06 मार्च (हि.स.)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि राज्य मजबूत वित्तीय प्रबंधन और प्रभावी संसाधन जुटाने की नीतियों के साथ आगे बढ़ रहा है, लेकिन केंद्र सरकार की कर नीति में हुए बदलावों के कारण राज्य के राजस्व संग्रहण को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह बात शुक्रवार को 2026–27 का राज्य बजट पेश करते हुए कही।
मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद सरकार द्वारा उठाए गए प्रभावी कदमों के कारण राज्य के स्वयं के राजस्व संग्रह में स्थिरता बनी हुई है। 2024–25 की तुलना में 2025–26 के संशोधित अनुमानों में राज्य के स्वयं के राजस्व में 8.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि राज्य के कर राजस्व में जीएसटी की महत्वपूर्ण भूमिका है और राज्य के स्वयं के कर राजस्व में जीएसटी की हिस्सेदारी लगभग 43 प्रतिशत है। जीएसटी संग्रह के मामले में कर्नाटक देश में दूसरे स्थान पर है।
हालांकि, वित्तीय वर्ष के बीच में केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी दरों के तर्कसंगतकरण के कारण राज्य के राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। दरों में बदलाव से पहले राज्य का मासिक जीएसटी संग्रह औसतन 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा था, लेकिन संशोधन के बाद यह वृद्धि घटकर करीब 4 प्रतिशत रह गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बदलाव के कारण वित्तीय वर्ष 2025–26 में राज्य को लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ा है। वहीं अगले वित्तीय वर्ष में यह नुकसान बढ़कर लगभग 15 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी जीएसटी संग्रह अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। चालू वर्ष में देशभर में करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये और अगले वर्ष लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के राजस्व घाटे की आशंका है, जिससे राज्यों को केंद्र से मिलने वाली कर हिस्सेदारी पर भी असर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि जीएसटी दरों के तर्कसंगतकरण से राज्यों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कर्नाटक सहित सात अन्य राज्यों ने जीएसटी परिषद को संयुक्त ज्ञापन सौंपा है। राज्य सरकार ने केंद्र से मांग की है कि दर संशोधन के कारण राज्यों के राजस्व पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव को ध्यान में रखते हुए उचित मुआवजा दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने वित्त आयोगों की सिफारिशों का उल्लेख करते हुए बताया कि चौदहवें वित्त आयोग के दौरान कर्नाटक की कर हिस्सेदारी 4.713 प्रतिशत थी, जो पंद्रहवें वित्त आयोग की अवधि में घटकर 3.647 प्रतिशत रह गई। इससे पिछले छह वर्षों में राज्य को लगभग 65 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। हालांकि सोलहवें वित्त आयोग की रिपोर्ट में कर्नाटक के लिए 4.131 प्रतिशत कर हिस्सेदारी की सिफारिश की गई है, जिसे राज्य के लिए आंशिक राहत माना जा रहा है। राजस्व दबाव के बावजूद राज्य सरकार सामाजिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार की गारंटी योजनाओं के तहत फरवरी 2026 तक कुल 1,21,598 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है। कर्नाटक वित्तीय उत्तरदायित्व अधिनियम के अनुसार वित्तीय घाटा जीएसडीपी के 3 प्रतिशत के भीतर और कुल सार्वजनिक देनदारियां जीएसडीपी के 25 प्रतिशत के भीतर रखी गई हैं।-----------------
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश महादेवप्पा