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जयपुर, 06 मार्च (हि.स.)। जयपुर विकास प्राधिकरण दो साल बाद भी टोंक फाटक पुलिया अंडरपास के पास वाली जमीन का रेलवे से विवाद नहीं सुलझा पाया है। इसके चलते रोजाना सैंकड़ों वाहन चालक यातायात जाम की समस्या से जूझ रहा है। जेडीए की लक्ष्मी मंदिर तिराहे को लाइट फ्री कर आमजन को जाम से मुक्ति दिलाने की कोशिश अधूरी रह गई। कांग्रेस शासन में 21 सितम्बर 2023 को लक्ष्मी मंदिर अंडरपास का उद्धाटन किया गया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार टोंक फाटक पुलिया के नजदीक स्थित जेडीए की एक बेशकीमती जमीन पर उत्तर-पश्चिमी रेलवे ने कब्जा जमा रखा है। जेडीए इस जमीन को खाली करवाने के लिए रेलवे प्रशासन को कई बार पत्र भी लिख चुका है, लेकिन रेलवे प्रशासन कब्जा खाली करने को तैयार नहीं है। रेलवे का यह कब्जा आमजन के यातायात को सुगम बनाने के काम में बाधा बन रहा है।
इंजीनियरिंग डायरेक्टर अजय गर्ग ने बताया कि जमीनी विवाद सुलझाने काे लेकर रेलवे अधिकारियाें से वार्ता का दाैर जारी है। जल्द समाधान निकल आएगा।
गौरतलब है कि यातायात को सुगम बनाने के लिए जेडीए ने लक्ष्मी मंदिर तिराहे पर दो अंडरपास बना दिए। इस तिराहे को ट्रेफिक लाइट मुक्त करवाने की दिशा में गांधी नगर की तरफ से आने वाला यातायात टोंक फाटक पुलिया के नीचे से होकर सहकार मार्ग पर जाएगा। इसके लिए टोंक फाटक पुलिया के नीचे सड़क मार्ग को चौड़ा किया जाना है। लेकिन इस जमीन पर लम्बे समय से रेलवे प्रशासन ने कब्जा कर रखा है। शहर के सबसे मुख्य लक्ष्मी मन्दिर तिराहे पर 65 करोड़ लागत से अंडरपास बनाकर सिग्नल फ्री किया है। इसके लिए सहकार मार्ग से नेहरू बाल उद्यान तक टोंक रोड तक दो लेन अंडरपास गया है। इस जक्शन को ट्रैफिक सिग्नल फ्री करने से सालाना 4 करोड़ का फ्यूल बच रहा है।
यातायात को सुगम बनाने की दिशा में रोड चौड़ी करने के लिए जेडीए को यहां 1350 स्क्वायर मीटर जमीन की जरुरत है। खास बात यह है कि गांधी नगर स्टेशन को वल्र्ड क्लास स्टेशन बनाने का काम भी चल रहा है। यहां पर जब पूरी तरह से लोगों का आवागमन शुरू हो जाएगा तो जमीन नहीं मिलने की सूरत में टोंक फाटक पुलिया के नीचे लगने वाले जाम की समस्या और विकराल रुप धारण कर लेंगी।
जेडीए ने रेलवे को पत्र लिखकर स्वामित्व संबंधी दस्तावेज मांगे है। जेडीए द्वारा लिखे गए पत्र में बताया गया है कि रामपुरारूपा के खसरा नम्बर 280/490 और 280/291 टोंक पुलिया से रेलवे लाइन के बीच का भाग आता है। सरकारी रिकॉर्ड में यह जमीन जेडीए के नाम दर्ज है। जबकि लम्बे समय से इस पर जमीन रेलवे ने कब्जा कर रखा है। स्वामित्व संबंध दस्तावेजों जमा करवाने को लेकर जेडीए कई बार रेलवे को पत्र लिख चुके है, लेकिन रेलवे ने एक भी पत्र का जवाब नहीं दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश