बलरामपुर : डीएमएफ बेसलाइन सर्वे पर जिला स्तरीय कार्यशाला संपन्न, 220 ग्राम पंचायतों में होगा सर्वे, बनेगी पंचवर्षीय कार्ययोजना
बलरामपुर, 06 मार्च (हि.स.)। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) अंतर्गत बेसलाइन सर्वे के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन आज जिला पंचायत सभाकक्ष में किया गया। कार्यशाला में जिला खनिज संस्थान न्यास के अध्यक्ष एवं कलेक्टर राजेन्द्र कटारा तथा सचिव एवं
कार्यशाला की फोटो।


बलरामपुर, 06 मार्च (हि.स.)। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) अंतर्गत बेसलाइन सर्वे के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन आज जिला पंचायत सभाकक्ष में किया गया। कार्यशाला में जिला खनिज संस्थान न्यास के अध्यक्ष एवं कलेक्टर राजेन्द्र कटारा तथा सचिव एवं जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर उपस्थित रहीं।

कलेक्टर राजेन्द्र कटारा ने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए बेसलाइन सर्वे अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि सर्वे के आधार पर आगामी पांच वर्षों के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सके। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय और कन्वर्जेंस के माध्यम से योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के निर्देश दिए। कलेक्टर ने बताया कि जिले की 82 प्रत्यक्ष और 138 अप्रत्यक्ष प्रभावित कुल 220 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करते हुए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके लिए हितग्राहीवार जानकारी संकलित कर योजना में शामिल करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंच सके।

जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर ने कहा कि सर्वेक्षण कार्य शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों में बेसलाइन सर्वे के साथ पंचवर्षीय परिप्रेक्ष्य योजना और वार्षिक योजना तैयार की जाएगी, जिसमें विभिन्न विभागों के कार्यों को समाहित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में 9 मार्च तक सभी सर्वेक्षण दलों का गठन कर लिया जाएगा, ताकि निर्धारित समय-सीमा में सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को गंभीरता के साथ कार्य करते हुए सर्वेक्षण कार्य समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए।

अपर कलेक्टर आर.एन. पाण्डेय ने बताया कि बेसलाइन सर्वे के लिए जिला एवं विकासखंड स्तरीय समितियों का गठन किया गया है। सभी समितियां निर्धारित प्रारूप के अनुसार अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए सर्वेक्षण कार्य को व्यवस्थित रूप से संपन्न करेंगी। कार्यशाला में जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनरों द्वारा पीपीटी के माध्यम से विस्तृत जानकारी भी दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे कर सामुदायिक भागीदारी और पारदर्शिता के साथ कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके लिए पहले क्षेत्र की पहचान कर बेसलाइन सर्वे किया जाएगा, इसके बाद डेटा संग्रहण और गैप का परीक्षण कर पंचवर्षीय परिप्रेक्ष्य योजना तथा वार्षिक योजना तैयार की जाएगी। खनिज संस्थान न्यास नियमों के अनुसार उपलब्ध निधि का न्यूनतम 70 प्रतिशत उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों तथा 30 प्रतिशत राशि अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में व्यय की जाएगी। उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, वृद्ध एवं दिव्यांगजन कल्याण, कौशल विकास और आजीविका सृजन, स्वच्छता, आवास तथा कृषि और पशुपालन से जुड़े कार्य शामिल हैं। वहीं अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों में भौतिक अधोसंरचना, सिंचाई, ऊर्जा और वाटरशेड विकास से जुड़े कार्य किए जाएंगे।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को चार समूहों में विभाजित कर पांच वर्ष की कार्ययोजना तैयार कर सामूहिक प्रस्तुतीकरण भी कराया गया, जिससे प्रतिभागियों में विषय को लेकर साझा समझ विकसित हो सके। कार्यक्रम में जिला स्तरीय समिति, विकासखंड स्तरीय समिति के सदस्य तथा मास्टर ट्रेनर उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय