छिंदवाड़ाः आस्था के नाम पर मेघनाथ मेले में लोग लगाते हैं जान की बाजी
छिंदवाड़ा, 06 मार्च (हि.स.)। वैसे तो दुनिया में कई तरह के खतरनाक खेल होते हैं, जिनमें लोग आस्था के नाम पर जान की बाजी लगाते हैं। ऐसा ही आस्था के नाम पर एक खेल मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के उमरेठ में लगने वाले मेघनाथ मेले में खेला जाता है। मेघन
Chhindwara ke umreth me samiti


Chhindwara ke umreth me samiti


छिंदवाड़ा, 06 मार्च (हि.स.)। वैसे तो दुनिया में कई तरह के खतरनाक खेल होते हैं, जिनमें लोग आस्था के नाम पर जान की बाजी लगाते हैं। ऐसा ही आस्था के नाम पर एक खेल मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के उमरेठ में लगने वाले मेघनाथ मेले में खेला जाता है। मेघनाथ मेला रंगों के त्यौहार होली से शुरू होता है और पंचमी तक चलता है।

छिंदवाड़ा जिले के उमरेठ में आज भी एक ऐतिहासिक मेघनाथ मेला न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि यहां आदिवासी संस्कृति और मेघनाथ के प्रति आदिवासियों की गहरी आस्था और श्रद्धा का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिलता है। लगभग 30 फीट की ऊंचाई पर हवा में श्रद्धालु झूलते हैं। मान्यता पूरी होने पर श्रद्धालुओं को खूंटी पर बांधकर हवा में गोल-गोल घुमाया जाता है। जो मेले का सबसे खतरनाक और मुख्य हिस्सा है।

उमरेठ में चर्चित है ये किवदंती

मेघनाथ मेला(खंडेरा बाबा समिति) अध्यक्ष ओंकार मालवीय ने शुक्रवार को बताया कि जब उमरेठ में किसी प्रकार की सुख समृद्धि नहीं होती थी। जब भी यहां कोई बसना चाहता था तो यहां कोई ना कोई प्राकृतिक आपदा के कारण वह पूर्णत नष्ट हो जाता था। जब से यहां पर खंडेरा बाबा और मां निकुम्बला देवी की स्थापना हुई उसके बाद यहां पर किसी प्रकार की कोई प्राकृतिक आपदा के कारण गांव उजड़ा नहीं।इसके बाद से ही यहां लगातार हर साल होली से 5 दिनों तक मेघनाथ मेला लगता है।

आज के युग में भी आदिवासियों के लिए रावण उनके आराध्य हैं। उनके पुत्र मेघनाथ मां निकुम्बला देवी के भक्त थे। जिनकी आराधना आदिवासी समाज के लोग करते हैं। खंडेरा बाबा के पास आकर लोग मन्नत मांगते हैं और जब उनकी मान्यताएं पूरी हो जाती हैं, तब यहां पर आकर लगभग 30 फीट की ऊंचाई पर एक मोटी लकड़ी से उन्हें कपड़ा या रस्सी के सहारे कमर पर बांध दिया जाता है और फिर उन्हें उनकी मान्यता के अनुसार एक से पांच चक्कर तक घुमाया जाता है। आदिवासी समाज के लोग आज भी परंपरा और मान्यताओं का निर्वहन करते चले आ रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / sandeep chowhan