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बांदीपोरा, 05 मार्च (हि.स.)। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ पीडीपी नेता नईम अख्तर ने गुरुवार को बांदीपोरा जिला अस्पताल में जीवन रक्षक एरिथ्रोपोइटिन (ईपीओ) इंजेक्शन की कथित कमी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्थिति डायलिसिस रोगियों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने के समान है।
एक बयान में अख्तर ने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) से पीड़ित और अस्पताल में डायलिसिस करा रहे मरीजों को सरकारी अस्पताल में इंजेक्शन उपलब्ध न होने के कारण बाजार से महंगे इंजेक्शन खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि इतनी आवश्यक दवा लगभग एक महीने से अनुपलब्ध है जबकि मरीज लगातार पीड़ित हैं। डायलिसिस रोगियों को पहले से ही भारी शारीरिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और उन्हें बाजार से महंगे इंजेक्शन खरीदने के लिए मजबूर करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अख्तर ने कहा कि यह घटनाक्रम जिले में स्वास्थ्य प्रशासन के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) वहां तैनात हैं लेकिन अपनी नाक के नीचे हो रही घटनाओं से अनभिज्ञ प्रतीत होते हैं।
उन्होंने कहा, यह स्पष्ट प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। “उचित निगरानी का अभाव। अगर हफ्तों तक आवश्यक दवाएं न मिलें, तो यह व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता उन्होंने आगे कहा।
पूर्व मंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री से इस मामले का तुरंत संज्ञान लेने और कमी की गहन जांच का आदेश देने का आग्रह किया। स्वास्थ्य मंत्री को बिना देरी किए हस्तक्षेप करना चाहिए और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। डायलिसिस रोगियों के जीवन के साथ खिलवाड़ करना अस्वीकार्य है और ऐसी लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए अख्तर ने कहा।
उन्होंने सभी सरकारी अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया ताकि मरीजों, विशेष रूप से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को प्रशासनिक खामियों के कारण परेशानी न हो।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता