नीलमत पुराण और राजतंरिगिणी जैसे ग्रंथों को इतिहास के पाठ्यक्रमों में होना चाहिए शामिल : प्रो. अग्निहोत्री
धर्मशाला, 23 मार्च (हि.स.)। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि इतिहास लेखन की भारतीय दृष्टि और शैली अलग है। इस दृष्टि और शैली से अनभिज्ञता के कारण पश्चिमी इतिहासकार यह मान बैठते हैं कि
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