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- इतिहास से सीखकर विकसित ओडिशा और विकसित भारत बनाने के लिए धर्मेन्द्र प्रधान ने किया आह्वान
भुवनेश्वर, 15 मार्च (हि.स.)। अतीत का गौरवशाली इतिहास ही भविष्य की समृद्धि का सबसे बड़ा मार्गदर्शक होता है। इतिहास के दर्पण में अपनी सभ्यता और संस्कृति को समझते हुए ‘विकसित ओडिशा’ और ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए नई दिशा तय करना समय की आवश्यकता है। यह बात केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा संबलपुर सांसद धर्मेन्द्र प्रधान ने रविवार को संबलपुर में आयोजित शिखर-2026 प्रांतीय अधिवेशन में कही। यह कार्यक्रम उत्कल प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान ने भारत की प्राचीन सभ्यता से लेकर वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प तक मारवाड़ी समाज की भूमिका और ओडिशा की आर्थिक प्रगति पर एक दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह अधिवेशन केवल एक सभा नहीं, बल्कि एकता, संकल्प और भविष्य के लिए नई दिशा तय करने का मंच है।
उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और इस उपलब्धि में देश के सभी नागरिकों के साथ मारवाड़ी समाज का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भारतीय संस्कृति, परंपरा और सभ्यता को आगे बढ़ाने में भी मारवाड़ी समाज की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास में सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण और लंबे समय तक गुलामी के कारण हम अपने गौरवशाली अतीत के कई पहलुओं को भूल गए थे, लेकिन अब इतिहास से सीख लेकर भविष्य के निर्माण का समय आ गया है।
प्रधान ने कहा कि वर्ष 2036 तक ओडिशा को समृद्ध बनाने और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए सभी को जिम्मेदारी निभानी होगी। विकसित भारत का सपना विकसित ओडिशा के बिना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि ओडिशा के 50 हजार से अधिक गांवों का समग्र विकास करना इस दिशा में अत्यंत आवश्यक है। यदि समाज का नेतृत्व और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी तो विकास की गति भी तेज होगी। इस दिशा में मारवाड़ी समाज को भी अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने संबलपुर को संभावनाओं से भरा शहर बताते हुए इसे ‘एजुकेशन हब’ और ‘इकोनॉमिक जोन’ के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधान ने कहा कि भारत की वास्तविक पूंजी ‘ज्ञान’ है और शिक्षा को प्राथमिकता देने से ही समाज में व्यापक परिवर्तन संभव है।
इस अवसर पर उन्होंने मारवाड़ी समाज से पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने, मातृभाषा को बढ़ावा देने तथा विशेष अवसरों पर आंगनवाड़ी केंद्रों में छोटे बच्चों को फल और पौष्टिक भोजन वितरित करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री के आह्वान के अनुरूप स्वस्थ जीवन के लिए भोजन में तेल के उपयोग को कम करने की भी सलाह दी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता महंतो