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समालखा, 15 मार्च (हि.स.)। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार की नीति का समर्थन करते हुए दत्तात्रेय होसबाले ने रविवार को कहा कि संघ विश्व में शांति का पक्षधर है। उन्होंने कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर संघ कोई विशेष टिप्पणी नहीं करना चाहता। संगठन की स्पष्ट धारणा है कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है। संघ चाहता है कि विश्व में चल रहे संघर्ष जल्द समाप्त हों और शांति की स्थापना हो। उन्होंने कहा कि भारत सरकार भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति स्थापित करने के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रही है और भारत के हित में निर्णय ले रही है।
हरियाणा के समालखा में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का समापन रविवार को होने जा रहा है। इस अवसर पर संघ ने अपनी संगठनात्मक संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन की घोषणा की है। जमीनी स्तर पर कार्य के विस्तार और संगठन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से अब ‘प्रांत’ इकाइयों के स्थान पर ‘संभाग’ इकाइयों का गठन किया जाएगा। वर्तमान में देशभर में 46 प्रांत हैं, जिन्हें पुनर्गठित कर लगभग 80 संभाग बनाए जाएंगे।
प्रतिनिधि सभा के इतर आयोजित पत्रकार वार्ता में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बताया कि संगठनात्मक ढांचे में यह बदलाव कार्य के विकेंद्रीकरण और विस्तार को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अभी प्रांत स्तर पर प्रचारकों की नियुक्ति होती है, उसी प्रकार अब प्रत्येक संभाग में भी संभाग प्रचारक नियुक्त किए जाएंगे। नई व्यवस्था के अनुसार संघ की संरचना में जिला और विभाग के बाद संभाग इकाई होगी, जबकि उसके ऊपर क्षेत्र तथा अखिल भारतीय स्तर की व्यवस्था पूर्ववत बनी रहेगी। उनका कहना था कि इस परिवर्तन से संगठन की गतिविधियों को स्थानीय स्तर तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचाने में सहायता मिलेगी।
पत्रकार वार्ता के दौरान संघ के प्रचार अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर भी उनके साथ मौजूद रहे।
विश्व में जारी संघर्षों के विषय में केंद्र सरकार की नीति का समर्थन करते हुए दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि संघ विश्व में शांति का पक्षधर है। उन्होंने कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर संघ कोई विशेष टिप्पणी नहीं करना चाहता। संगठन की स्पष्ट धारणा है कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है। संघ चाहता है कि विश्व में चल रहे संघर्ष जल्द समाप्त हों और शांति की स्थापना हो। उन्होंने कहा कि भारत सरकार भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति स्थापित करने के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रही है।
ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही रैलियों और प्रदर्शनों के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर होसबाले ने कहा कि लोग अपनी आस्था और भावनाओं के अनुसार इस प्रकार के आयोजन करते हैं। संघ का मानना है कि सभी प्रकार के प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से होने चाहिए।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के विषय में पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने कहा कि इस मामले में संघ की ओर से अभी कोई औपचारिक मत व्यक्त नहीं किया गया है। वर्तमान में यह विषय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और न्यायालय ने इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा रखी है। उनका कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने के बाद ही इस विषय पर किसी प्रकार की टिप्पणी उचित होगी।
संघ नेतृत्व की ओर से आज एक बार फिर स्पष्ट किया कि संगठन किसी के विरोध में नहीं बना है। होसबाले ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मूल उद्देश्य हिंदू समाज की एकता और संगठन के लिए कार्य करना है। उन्होंने कहा कि संघ की यह सोच प्रारंभ से ही रही है और सरसंघचालकों ने भी अपने वक्तव्यों में इसका उल्लेख समय-समय पर किया है। संघ का मानना है कि भारत में रहने वाले सभी लोगों के पूर्वज एक ही सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े रहे हैं।
पत्रकार वार्ता से की शुरुआत में उन्होंने बताया कि संघ जाति, प्रांत से ऊपर उठकर देश के बारे में वाले लोगों का संगठन है। समाज के लिए कुछ करने वाले ऐसे लोगों को संघ संगठित भी करता है और प्रशिक्षित भी करता है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में इसी दृष्टि से 75 प्रशिक्षण वर्गों का भी आयोजन किया जा रहा है। इनमें से 11 क्षेत्रीय और एक अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित होगा।
होसबाले ने कहा कि संघ समाज में सकारात्मक परिवर्तन और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने के लिए कई विषयों पर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष संघ ने समाज के दृष्टिकोण से पाँच प्रमुख विषयों ‘पंचपरिवर्तन’ को सामने रखा था, जिनमें सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। इन विषयों के माध्यम से समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक देश पर ब्रिटिश शासन रहने के कारण समाज में एक औपनिवेशिक मानसिकता विकसित हो गई थी। इसे अब समाप्त करने की आवश्यकता है।
होसबाले ने यह भी स्पष्ट किया कि देशभक्ति केवल संघ कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं है। देशभर में अनेक संस्थाएँ और व्यक्ति राष्ट्रहित में कार्य कर रहे हैं। यदि इन सभी के बीच सहयोग और समन्वय बढ़ेगा तो राष्ट्र की सामूहिक शक्ति और अधिक सशक्त होगी।
संगठनात्मक विस्तार के विषय में उन्होंने बताया कि वर्तमान में देशभर में लगभग 88,949 शाखाएँ 55,683 स्थानों पर संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि संघ की शाखाओं का विस्तार जनजातीय और दूरदराज़ क्षेत्रों तक भी हुआ है, जिससे राष्ट्रीय एकता की भावना को और मजबूती मिल रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा