Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

कानपुर, 15 मार्च (हि.स.)। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए बागवानी, पशुपालन और उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी युवाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। इन माध्यमों से छात्र आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ समाज में जागरूकता भी फैला सकते हैं। यह बातें रविवार को एनएसएस के विशेष शिविर के चतुर्थ दिवस पर डॉ. राजीव कुमार ने कहीं।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की विभिन्न इकाइयों द्वारा आयोजित विशेष शिविर के चौथे दिन छात्रों के लिए ग्रामीण स्वरोजगार विषय पर तकनीकी परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में छत पर बागवानी, पशुपालन तथा इनके प्रबंधन के आधुनिक तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. उमा नाथ शुक्ला ने किया। इस अवसर पर डॉ. अरुण कुमार ने पशुपालन को ग्रामीण स्वरोजगार का महत्वपूर्ण साधन बताते हुए इसके तकनीकी पहलुओं पर उदाहरण सहित जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बकरी पालन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है, जिससे ग्रामीण युवा आसानी से आय अर्जित कर सकते हैं।
गेस्ट फैकल्टी डॉ. सोमेन्द्र ने छत पर बागवानी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे स्वरोजगार के अवसर बढ़ते हैं और परिवार को ताजा व पोषक खाद्य सामग्री भी उपलब्ध होती है।
कार्यक्रम में डॉ. सर्वेश कुमार, डॉ. संघमित्रा महापात्रा, डॉ. रजत मिश्रा सहित अन्य शिक्षक एवं स्वयंसेवक मौजूद रहे। अंत में डॉ. संघमित्रा महापात्रा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप