भिक्षु बनकर हंसना संतों से सीखें : राजन जी महाराज
सीवान, 15 मार्च (हि.स.)। सीवान नगर के वीएमएचई इंटर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित श्रीराम कथा के सातवें दिन अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक राजन जी महाराज ने केवट प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने जीवन में संतोष, भक्ति और सेवा की महत्ता पर
महाराज जी से आशीर्वाद लेते विद्या भारती के प्रदेश सचिव राम लाल सिंह


सीवान, 15 मार्च (हि.स.)। सीवान नगर के वीएमएचई इंटर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित श्रीराम कथा के सातवें दिन अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक राजन जी महाराज ने केवट प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने जीवन में संतोष, भक्ति और सेवा की महत्ता पर प्रकाश डाला। मधुर भजनों और स्वरलहरियों के बीच “करूणानिधान रउआ जगत के दाता हई” भजन पर श्रद्धालु झूम उठे और पूरा वातावरण भक्ति रस में सराबोर हो गया।

राजन जी महाराज ने कहा कि संसार में बहुत लोग धन-संपत्ति पाकर मुस्कुराते हैं, लेकिन सच्चा आनंद तो संतों से सीखने को मिलता है, जो भिक्षु बनकर भी प्रसन्न रहते हैं। उन्होंने बताया कि भिक्षु और भिखारी में बड़ा अंतर होता है। भिक्षु संतोष और आत्मिक आनंद से भरपूर होता है, जबकि भिखारी अभाव और अपेक्षाओं से ग्रस्त रहता है।

कथा की शुरुआत मुख्य यजमान सुभाष प्रसाद, धर्मशिला देवी तथा सह यजमान रूपेश कुमार, नेहा गुप्ता सहित अन्य दैनिक यजमानों द्वारा श्रीरामचरितमानस की आरती के साथ हुई। इंजीनियर अशोक कुमार पांडेय, अनीता पांडेय, राजीव चौबे, पुष्पा चौबे, वैभव कुमार, प्रीति चौरसिया और कन्हैया सहित कई श्रद्धालुओं ने यजमान के रूप में भाग लिया।

राजन जी ने कहा कि जीवन में आनंद बनाए रखने के लिए अयोध्याकांड की प्रथम आठ चौपाइयों का नियमित पाठ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुख केवल धन से नहीं मिलता, बल्कि संतोष से प्राप्त होता है। मनुष्य को हर परिस्थिति में संतुष्ट रहना चाहिए और निरंतर राम नाम का स्मरण करते हुए अपने कर्म करते रहना चाहिए।

उन्होंने बताया कि अयोध्या में जब राजा दशरथ श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी करते हैं, तब मंथरा की सलाह पर माता कैकेयी श्रीराम के वनवास और भरत के राज्याभिषेक का वर मांग लेती हैं। राजन जी ने कहा कि इसमें कैकेयी का दोष नहीं था, बल्कि यह सब प्रभु की लीला थी।

वनगमन के दौरान श्रीराम की निषादराज से मित्रता और गंगा पार करते समय केवट की निष्कपट भक्ति का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि मित्र, गुरु, स्वामी और बहन के यहां कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। केवट की विनम्र भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम ने उसे अपने चरण धोने की अनुमति दी। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

कथा के दौरान महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, विद्याभारती के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह, विभाग निरीक्षक अनिल कुमार राम, राजेश रंजन, कृष्ण प्रसाद, ललित राय, प्रधानाचार्य डॉ. कुमार विजय रंजन, कमलेश सिंह, भाजपा नेता मुकेश कुमार बंटी, वीएमएचई के प्रधानाचार्य राकेश कुमार सिंह तथा शिक्षाविद् पुष्पेंद्र पाठक सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

आगंतुक अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. राजन कल्याण सिंह, स्वागताध्यक्ष डॉ. शरद चौधरी, संयोजक डॉ. रूपेश कुमार, कोषाध्यक्ष प्रेमशंकर सिंह और सदस्य दीपक कुमार सिंह ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma