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-जीटीबी, कैंसर संस्थान और राजीव गांधी अस्पताल का होगा विलय, दिल्ली को मिलेगा निमहंस-2 का तोहफा
नई दिल्ली, 15 मार्च (हि.स.)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और अधिक प्रभावी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ने राजधानी के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों जैसे गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबी), दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (डीएससीआई) और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (आरजीएसएसएच) को एकीकृत कर एम्स की तर्ज पर स्वायत्त संस्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। वहीं, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर ऐंड एलाइड साइंसेज (इहबास) को भविष्य में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान-2 ( निमहंस-2) के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। यह जानकारी रविवार को एक विज्ञप्ति के जरिए दी गई।
विज्ञप्ति के मुताबिक,इस संबंध में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हाल ही में दिल्ली सचिवालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में राजधानी के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों को एकीकृत करते हुए एक सशक्त और आधुनिक चिकित्सा तंत्र विकसित करने, उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का समुचित और वैज्ञानिक उपयोग बेहद जरूरी है। विभिन्न संस्थानों के एकीकरण से डॉक्टरों, विशेषज्ञों, चिकित्सा उपकरणों और आधारभूत संरचना का बेहतर उपयोग हो सकेगा और मरीजों को अधिक सुव्यवस्थित तथा उन्नत चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।
बैठक में अस्पतालों में उपलब्ध बिस्तरों की स्थिति और मरीजों के दबाव पर भी चर्चा की गई। बताया गया कि राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कुल 650 बेड की क्षमता है, लेकिन फिलहाल लगभग 250 बेड ही उपयोग में हैं और करीब 400 बेड खाली पड़े हैं। दूसरी ओर दिल्ली कैंसर इंस्टीट्यूट और जीटीबी अस्पताल में मरीजों की संख्या क्षमता से अधिक है। जीटीबी अस्पताल में लगभग 1400 बेड की मूल क्षमता के मुकाबले 1500 से अधिक बेड उपयोग में हैं। मरीजों के आंकड़ों के अनुसार जीटीबी अस्पताल में ओपीडी में लगभग 14 लाख से अधिक मरीज आते हैं और करीब 95 हजार मरीज इन पेशेंट डिपार्टमेंट (आईपीडी) सेवाएं लेते हैं। वहीं दिल्ली कैंसर इंस्टीट्यूट में लगभग 1.27 लाख ओपीडी मरीज और राजीव गांधी अस्पताल में लगभग 2.87 लाख ओपीडी मरीज दर्ज किए गए हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जीटीबी अस्पताल पर मरीजों का अत्यधिक दबाव है जबकि कुछ अस्पतालों की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अस्पतालों के एकीकरण के बाद विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का सुव्यवस्थित वितरण किया जाएगा ताकि मरीजों को बेहतर और विशेषज्ञ उपचार मिल सके। प्रस्ताव के अनुसार राजीव गांधी अस्पताल में कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, गैस्ट्रो सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, रूमेटोलॉजी और क्लीनिकल हेमेटोलॉजी जैसी सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट को कैंसर उपचार से संबंधित सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा, जहां रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, पेलिएटिव केयर और रेडियो इमेजिंग जैसी सेवाओं को समेकित किया जाएगा। वहीं गुरु तेग बहादुर अस्पताल में ऑर्थोपेडिक्स, इंटरनल मेडिसिन, ईएनटी, जनरल सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, एंडोक्रिनोलॉजी, नेत्र रोग सहित कई विभागों को और मजबूत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा उपकरण मौजूद हैं, लेकिन विशेषज्ञ स्टाफ की कमी और संसाधनों के बिखरे होने के कारण उनका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। उदाहरण के तौर पर राजीव गांधी अस्पताल में उन्नत ब्रोंकोस्कोपी सुविधा उपलब्ध है, दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में रेडियोथेरेपी के लिए लीनियर एक्सीलेरेटर मौजूद है, राजीव गांधी अस्पताल में कैथ लैब और इको लैब हैं, जबकि जीटीबी अस्पताल में बोन बैंक है। एकीकृत व्यवस्था के तहत इन सभी महंगे उपकरणों का बेहतर और समन्वित उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य दिल्ली में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास करना और राजधानी को चिकित्सा उत्कृष्टता का नया केंद्र बनाना है।
मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि दिल्ली सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (इहबास) को अब बेंगलुरु के प्रतिष्ठित संस्थान (निमहंस) की तर्ज पर ‘निमहंस-2’ के रूप में विकसित करेगी। इसके अंतर्गत इहबास अपनी 75 एकड़ खाली भूमि गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबीएच) को सौंपेगा। इस भूमि का उपयोग एक विशाल ‘एकीकृत संस्थान’ विकसित करने के लिए किया जाएगा। इहबास के पास वर्तमान में कुल 111.69 एकड़ भूमि है, जिसमें से अधिकांश हिस्सा खाली और भविष्य के विस्तार के लिए उपयुक्त है।
मुख्यमंत्री के अनुसार इहबास का वर्तमान अस्पताल भवन लगभग 19.9 एकड़ में फैला है, लेकिन संस्थान की कई पुरानी इमारतें जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी हैं। इस नए एकीकरण प्रोजेक्ट के तहत, इन पुरानी संरचनाओं की जगह आधुनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा खड़ा किया जाएगा। इस भूमि का उपयोग नए हॉस्टल, अत्याधुनिक लैब (पैथोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री), ऑडिटोरियम और लेक्चर थिएटर बनाने के लिए होगा। सरकार का उद्देश्य इन चारों संस्थानों को एक साथ लाकर दिल्ली को चिकित्सा उत्कृष्टता का एक राष्ट्रीय केंद्र बनाना है। मुख्यमंत्री का कहना है कि इस कदम से न केवल मरीजों को विश्व स्तरीय विशिष्ट उपचार मिलेगा, बल्कि अनुसंधान और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी दिल्ली देश का नेतृत्व करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव