यमुनानगर में बसों की कमी, 60 गांव अब भी परिवहन सुविधा से दूर
यमुनानगर जिले में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उसी अनुपात में मजबूत नहीं हो पाई है। यमुनानगर रोडवेज डिपो में बसों की कमी के कारण ग्रामीण और शहरी रूटों पर यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
यमुनानगर में बसों की कमी, 60 गांव अब भी परिवहन सुविधा से दूर


यमुनानगर, 15 मार्च (हि.स.)। यमुनानगर जिले में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उसी अनुपात में मजबूत नहीं हो पाई है। यमुनानगर रोडवेज डिपो में बसों की कमी के कारण ग्रामीण और शहरी रूटों पर यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि जिले के लगभग 60 गांव आज भी नियमित बस सेवा से नहीं जुड़ पाए हैं।

परिवहन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यमुनानगर डिपो के लिए 265 बसों का फ्लीट स्वीकृत है, जबकि वर्तमान में डिपो के पास करीब 160 बसें ही मौजूद हैं। इनमें से भी प्रतिदिन लगभग 150 बसें ही विभिन्न रूटों पर संचालित हो पाती हैं। शेष बसें तकनीकी खराबी, रखरखाव या अन्य कारणों से डिपो में खड़ी रहती हैं।

अधिकारियों के अनुसार संचालन में लगी बसों में भी कई वाहन ऐसे हैं जिन्हें जल्द ही मरम्मत की आवश्यकता है। इससे भविष्य में बसों की उपलब्धता और प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। बसों की सीमित संख्या के कारण कई मार्गों पर सेवाओं की आवृत्ति कम हो गई है, जिसके चलते यात्रियों को लंबे समय तक बसों का इंतजार करना पड़ता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में इसका प्रभाव अधिक दिखाई देता है। कई गांवों तक अब तक रोडवेज की नियमित बस सेवा नहीं पहुंच सकी है, जिससे लोगों को निजी वाहनों या अन्य साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। विभागीय स्तर पर बसों की संख्या बढ़ाने के लिए कई बार मुख्यालय को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि यदि डिपो के फ्लीट में वृद्धि होती है तो नए रूटों पर बस सेवा शुरू की जा सकती है, जिससे यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी और विभाग की आय में भी बढ़ोतरी होगी।

वर्तमान में डिपो को प्रतिदिन लगभग 13 से 14 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। कुछ गांवों में यात्रियों की संख्या अपेक्षाकृत कम होने के कारण भी बस सेवा नियमित नहीं हो पाती, जबकि कई स्थानों पर सड़कें संकरी होने से बड़े वाहनों का संचालन संभव नहीं है। इन परिस्थितियों के चलते ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आज भी बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा का इंतजार है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार