Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

यमुनानगर, 15 मार्च (हि.स.)। यमुनानगर के रामपुरा कॉलोनी स्थित हनुमान मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ में श्रद्धालुओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। तीसरे दिन वृंदावन से पधारे कथा व्यास आचार्य चैतन्य मृदुल ने ध्रुव, प्रह्लाद और विदुर चरित्र के प्रसंगों के माध्यम से भक्ति, धैर्य और सद्कर्म का संदेश दिया।
कथा के दौरान रविवार काे उन्होंने बताया कि भगवान की भक्ति के लिए आयु कोई बाधा नहीं है। ध्रुव की कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि एक बालक दृढ़ संकल्प और सच्ची श्रद्धा से ईश्वर को प्राप्त कर सकता है, तो हर व्यक्ति भी सच्चे मन से भक्ति करके परमात्मा की कृपा पा सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन में धैर्य और संयम अत्यंत आवश्यक हैं और कठिन परिस्थितियों में भी इनका साथ नहीं छोड़ना चाहिए। कथा में अजामिल, प्रह्लाद और अन्य प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने बताया कि व्यक्ति के कर्म ही उसके जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं। ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और सत्कर्म ही मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि सत्संग मनुष्य को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है और जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध कराता है। विदुर प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और विदुर के प्रेमपूर्ण संबंध की चर्चा की। उन्होंने बताया कि भगवान भोग-विलास नहीं बल्कि सच्चे प्रेम और समर्पण को स्वीकार करते हैं। यही कारण है कि भगवान ने राजमहल के वैभव को त्यागकर विदुर के घर प्रेम से परोसे गए साधारण भोजन को स्वीकार किया। कथा के दौरान उन्होंने मानव जीवन की नश्वरता और सत्कर्मों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में निष्काम भाव से ईश्वर का स्मरण करते हुए सत्कर्म करते रहना चाहिए। यही सच्ची भक्ति का मार्ग है, जो जीवन और मृत्यु दोनों को सार्थक बनाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार