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जबलपुर, 13 मार्च (हि.स.)। इन्दौर की तर्ज पर जबलपुर शहर को भिक्षावृत्ति की कुप्रथा से मुक्त करने और भिक्षुकों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए महापौर और निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार की पहल पर नगर निगम द्वारा एन यू एल एम स्माइल प्रोजेक्ट के अंतर्गत एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस ’भिक्षावृत्ति मुक्त शहर’ योजना के अंतर्गत, निगम द्वारा चयनित संस्था ने पवित्र गौरीघाट क्षेत्र में सघन सर्वे कार्य किया है।
इस संबंध में उपायुक्त अंकिता जैन एवं सामाजिक सुरक्षा अधिकारी तरुणा निप्सैया ने शुक्रवार को बताया कि सर्वेक्षण के दौरान अब तक कुल 267 भिक्षुकों की पहचान कर उनका डेटा तैयार किया गया है, जिसमें महिला भिक्षुक 180, पुरुष भिक्षुक 45 एवं बाल भिक्षुक 42 हैं। इस अभियान का उद्देश्य केवल भिक्षावृत्ति रोकना नहीं, बल्कि भिक्षुकों का सम्मानजनक पुनर्वास करना है।
भारत सरकार और राज्य शासन के संयुक्त प्रयासों से इन व्यक्तियों को कौशल प्रशिक्षण, आश्रय और सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा, ताकि वे स्वयं के पैरों पर खड़े हो सकें। विशेष रूप से 42 बाल भिक्षुकों के लिए शिक्षा और संरक्षण की विशेष योजना तैयार की जा रही है।
निगम प्रशासन ने शहर के नागरिकों से अपील की है कि प्रत्यक्ष रूप से दी जाने वाली भीख इस समस्या को बढ़ावा देती है, यदि नागरिक भिक्षुकों को पैसे देना बंद कर उन्हें सरकारी पुनर्वास केंद्रों की राह दिखाएंगे, तो यह उनके जीवन को स्थाई रूप से बदलने में सबसे बड़ी मदद होगी। जबलपुर को भिक्षावृत्ति मुक्त कर एक आदर्श शहर बनाना चाहते हैं। नागरिकों से अनुरोध है कि वे भिक्षुकों को सीधे दान देने के बजाय प्रशासन के पुनर्वास प्रयासों में सहयोग करें।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक