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जयपुर, 13 मार्च (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने अतिक्रमण को लेकर लंबित याचिका के बावजूद भी समान याचिकाकर्ता की ओर से उसी जगह के अतिक्रमण को नई याचिका के जरिए चुनौती देने को गंभीर माना है। इसके साथ ही अदालत ने इस याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं पर बीस हजार रुपए का हर्जाना लगा दिया है।
एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश विजय कुमार बोयत व तीन अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान जेडीए की ओर से अधिवक्ता अमित कुड़ी ने कहा कि समान मुद्दे पर याचिकाकर्ता की जनहित याचिका लंबित चल रही है। ऐसे में नई याचिका में उन्हीं बिंदुओं को उठाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। इस पर अदालत ने कहा कि याचिका क्वींस रोड और उसके आसपास के इलाके में हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए दायर की गई है। पूर्व की याचिका में भी यह मामला उठाया गया था और उस पर सुनवाई चल रही है। ऐसे में समान मुद्दे पर नई याचिका दायर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसलिए याचिका के विचारणीय नहीं होने के चलते उसे बीस हजार रुपये के हर्जाने के साथ खारिज किया जाता है। इस दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने याचिका वापस लेने की गुहार की। जिसकी अनुमति देते हुए अदालत ने कहा कि याचिका को वापस ली गई मानते हुए खारिज किया जाता है, लेकिन समान मुद्दे पर नई पीआईएल लगाने पर उन पर हर्जाना तो फिर भी लगाया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक