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अशोकनगर, 13 मार्च (हि.स.)। मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में नई आबकारी नीति के तहत जिले में शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया ने इस बार पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जिले में राजस्व प्राप्ति का आंकड़ा न केवल पिछले वर्ष से अधिक रहा, बल्कि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित 20 फीसदी वृद्धि के लक्ष्य को भी पीछे छोड़ते हुए 30.91 फीसदी की ऐतिहासिक बढ़त दर्ज की है।
राजस्व का गणित: करोड़ों का इजाफा
इस वर्ष हुई नीलामी प्रक्रिया में 33 समूह वार कम्पोजिट शराब दुकानों में से 23 दुकानों का आवंटन सफल रहा। आंकड़ों की तुलना करें तो गत वर्ष का राजस्व: 1,26,36,89,699 (लगभग 126.36 करोड़) इस वर्ष का राजस्व 1,65,42,74,172 (लगभग 165.42 करोड़) कुल वृद्धि सीधे तौर पर 39.05 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ जिले को हुआ है।
ठेकेदारों का बदलता समीकरण: रामकुमार रघुवंशी समूह का दबदबा
जिले में वर्षों से चले आ रहे शराब सिंडिकेट के समीकरण इस बार बदलते नजर आए। पारंपरिक रूप से दबदबा रखने वाले एनपी ग्रुप को पछाड़ते हुए रामकुमार रघुवंशी समूह सबसे बड़े खिलाड़ी के रूप में उभरा है।
ठेकेदार/समूह आवंटित दुकानों की संख्या प्रमुख क्षेत्र/दुकानें इस प्रकार रहीं रामकुमार रघुवंशी समूह 14 दुकानें अशोकनगर शहर (3), मोहरीराय, इमला, ईसागढ़ (2), कदवाया, पारसोल, ढाकौनी, शाढौरा, झीला, नईसराय और महीदपुर। घनश्याम राठौर (एनपी ग्रुप)5 दुकानें बंगला चौराहा, अथाईखेड़ा, राजपुर, कचनार और सेमराहाट। प्रियंका राय 4 दुकानें सहराई, तारई, पिपरई और सावनभादों।
नई आबकारी नीति का प्रभाव रहा कि सरकार की मंशा इस बार पूरे प्रदेश में समूहों का पुनर्गठन कर राजस्व को 20 फीसदी तक बढ़ाने की थी। हालांकि, जिले में ठेकेदारों के बीच हुई प्रतिस्पर्धा में आंकड़ा 30 फीसदी के पार चला गया।
शेष दुकानों पर टिकी नजरें
जिले की कुल 33 कम्पोजिट शराब दुकानों में से फिलहाल 23 का फैसला हो चुका है। अब सबकी नजरें चंदेरी और मुंगावली की शेष 10 दुकानों पर टिकी हैं। इन क्षेत्रों के लिए टेंडर प्रक्रिया अभी शेष है, जिससे जिला आबकारी विभाग को और अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद है।
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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार