छग विधानसभा :राज्य में लागू नई शिक्षा नीति के सवालों से घिरे मंत्री गजेंद्र यादव
रायपुर, 13 मार्च (हि.स.)।आज छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का 10वां दिन था। छत्तीसगढ़ विधानसभा में ध्यानाकर्षण के दौरान नई शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। सदन में मुद्दा उठा कि छत्तीसगढ़ में नई शिक्षा नीति अभी तक प
छत्तीसगढ़ विधानसभा


रायपुर, 13 मार्च (हि.स.)।आज छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का 10वां दिन था। छत्तीसगढ़ विधानसभा में ध्यानाकर्षण के दौरान नई शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। सदन में मुद्दा उठा कि छत्तीसगढ़ में नई शिक्षा नीति अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं हो पाई है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि सरकार चरणबद्ध तरीके से इसे प्रभावी बनाने के लिए रोडमैप पर काम कर रही है।

मंत्री ने जानकारी दी कि स्कूलों में गुणवत्ता सुधारने के लिए 5,000 शिक्षकों की नई भर्ती को वित्तीय स्वीकृति दी गई है। साथ ही, उन्होंने आंदोलनरत डीएड अभ्यर्थियों से अनशन समाप्त कर भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने की अपील भी की।

हाल ही में छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा के कठिन पैटर्न और सवालों को लेकर भी मंत्री से सवाल पूछे गए, जिस पर उन्होंने संज्ञान लेने की बात कही। मंत्री ने घोषणा की कि सभी जिलों में मॉडल स्कूल स्थापित किए जाएंगे और जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत को प्राथमिकता दी जाएगी।नई नीति के तहत बस्तर जैसे क्षेत्रों में स्थानीय बोलियों (जैसे गोंडी, हल्बी) में प्राथमिक शिक्षा देने की योजना पर भी चर्चा हुई।

कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य में नई शिक्षा नीति का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या नीति के अनुसार सभी स्कूलों में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुसार 22 छात्रों पर एक शिक्षक की व्यवस्था का प्रावधान है, जबकि छत्तीसगढ़ में युक्तियुक्तकरण के बाद औसतन 19 छात्रों पर एक शिक्षक उपलब्ध है। हालांकि मंत्री यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि यह व्यवस्था सभी स्कूलों में लागू है या नहीं। उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य में अभी नई शिक्षा नीति पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। इसके पीछे युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी न होना और कुछ मामलों का कोर्ट में लंबित होना बताया गया।

विधायक राघवेंद्र सिंह ने स्कूलों के मर्ज होने और यू-डाइस कोड समाप्त होने का मुद्दा भी उठाया। इस पर मंत्री ने बताया कि विभाग ने अलग-अलग यू-डाइस कोड की जगह एक ही कोड रखने और बाकी को समाप्त करने की अनुशंसा केंद्र सरकार को भेजी है।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और कांग्रेस विधायक शेषराज हरबंश के सवालों के जवाब में मंत्री ने कहा कि फिलहाल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं की व्यवस्था नहीं है। नई शिक्षा नीति के अनुसार 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी और बालवाड़ी की व्यवस्था है। राज्य में 11 हजार बालवाड़ी स्वीकृत किए गए हैं।

चर्चा के दौरान शेषराज हरबंश ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में हजारों स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जिनमें जांजगीर जिले के कई स्कूल भी शामिल हैं। इस पर मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि स्कूल बंद नहीं किए गए, बल्कि उन्हें मर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब 87 प्रतिशत स्कूल एक ही परिसर में संचालित हो रहे हैं और इसके लिए प्राचार्य की व्यवस्था की गई है।

नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने यह भी कहा कि आज गांव-गांव में निजी स्कूल खुल रहे हैं और सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहतर नहीं है। इस पर मंत्री ने माना कि प्रदेश में 7 हजार से अधिक निजी स्कूल खुल चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसके कारणों की समीक्षा की जाएगी और सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने की कोशिश की जाएगी, ताकि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे फिर से सरकारी स्कूलों की ओर लौट सकें।

नई शिक्षा नीति-2020 को लागू हुए 6 वर्ष हो चुके हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ में अभी भी यह नीति पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है। फिर चाहे वह मातृभाषा में शिक्षा देने का हो या फिर प्रत्येक स्कूल में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की नियुक्ति का हो या फिर गुणवत्तायुक्त शिक्षा का हो।

हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा