छग विधानसभा : दुग्ध उत्पादन पर घिरी सरकार, भाजपा विधायक अजय चंद्राकर बोले- अभी आत्मनिर्भर नहीं प्रदेश
रायपुर, 13 मार्च (हि.स.)।विधानसभा बजट सत्र के प्रश्नकाल में भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने मादा गौवंशीय पशुओं की संख्या, गर्भाधान नीति और टीकाकरण व्यवस्था पर सवाल उठाए। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने दुग्ध उत्पादन और गोवंश संरक्षण के मुद्दे पर अपनी ही
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर


रायपुर, 13 मार्च (हि.स.)।विधानसभा बजट सत्र के प्रश्नकाल में भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने मादा गौवंशीय पशुओं की संख्या, गर्भाधान नीति और टीकाकरण व्यवस्था पर सवाल उठाए। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने दुग्ध उत्पादन और गोवंश संरक्षण के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि प्रदेश दुग्ध उत्पादन के मामले में अभी भी आत्मनिर्भर नहीं है और राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है।

चंद्राकर ने कहा, ‘दुग्ध उत्पादन में हम आत्मनिर्भर नहीं हैं, इस क्षेत्र में स्थिति बहुत दयनीय है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार आपकी है, काम आप नहीं कर पा रहे और आरोप हम पर लगा रहे हैं। इसी दौरान चिराग परियोजना और नए केंद्रों की स्थापना पर भी चर्चा हुई।अजय चंद्राकर ने पूछा कि प्रदेश की 53 लाख मादा मवेशियों के लिए कृत्रिम गर्भाधान और टीकाकरण का क्या वार्षिक लक्ष्य था और वास्तव में कितना काम हुआ। जब मंत्री रामविचार नेताम ने सटीक आंकड़े देने के बजाय कहा कि जानकारी अलग से दे दी जाएगी, तो चंद्राकर ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे जवाब टालना बताया।

चंद्राकर ने प्रदेश में पशु विकास के लिए कार्य कर रहे 1,585 संस्थानों की प्रकृति (सरकारी या निजी) पर स्पष्टीकरण मांगा और यह भी पूछा कि घोषित 412 नए केंद्र कब तक अस्तित्व में आएंगे।

विपक्षी नेता चरणदास महंत ने गांवों की बछिया और कृत्रिम गर्भाधान के मुद्दे को सामने रखा, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चिराग परियोजना की राशि और कार्यप्रगति पर सवाल किए।बहस का एक बड़ा हिस्सा 183 करोड़ रुपये की 'चिराग परियोजना' पर केंद्रित रहा। सदन में यह तथ्य सामने आया कि इस विशाल बजट वाली योजना का मात्र 1फीसदी हिस्सा ही उपयोग हो सका, जिसे लेकर कांग्रेस ने भी सरकार को जमकर घेरा।

मंत्री राम विचार नेताम ने बचाव में कहा कि सरकार 'सेक्स-सॉर्टेड सीमेन' और 'राष्ट्रीय गोकुल मिशन' के जरिए बेहतर नस्लें विकसित कर रही है ताकि छत्तीसगढ़ का दुग्ध उत्पादन राष्ट्रीय औसत तक पहुँच सके।चंद्राकर का तर्क था कि केवल घोषणाओं से आत्मनिर्भरता नहीं आएगी। उन्होंने सवाल किया कि यदि नीतियां सही हैं, तो राज्य अभी भी दूध के लिए आत्मनिर्भर क्यों नहीं है।उन्होंने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन का स्तर अभी भी राष्ट्रीय औसत से कम है।

चंद्राकर ने राज्य की 53 लाख मादा मवेशियों के लिए कृत्रिम गर्भाधान और टीकाकरण की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि पशु विकास के लिए काम कर रहे 1,585 संस्थान सरकारी हैं या निजी और नए 412 केंद्र कब खोले जाएंगे।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने स्वीकार किया कि बेहतर नस्ल विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि दुग्ध उत्पादन को राष्ट्रीय औसत तक लाया जा सके। हालांकि, जब चंद्राकर ने वार्षिक लक्ष्यों और वास्तविक उपलब्धि पर स्पष्ट डेटा मांगा, तो मंत्री ने जानकारी अलग से देने की बात कही, जिस पर सदन में तीखी बहस हुई।

मंत्री नेताम ने बताया कि 'डेयरी समग्र विकास योजना' के लिए 90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है ताकि डेयरी उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा सके।

हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा