भारतीय कला की विविधता और वैश्विक संवाद पर मंथन : सुहास बहुलकर
कानपुर, 28 फरवरी (हि.स.)। भारतीय कला केवल अतीत की विरासत नहीं है, बल्कि उसकी विविधता और सतत परम्परा आज भी कलाकारों को नई सृजनात्मक दिशा देती है और वैश्विक मंच पर भारतीय कला का संवाद लगातार सशक्त हो रहा है। यह बातें शनिवार को छत्रपति शाहू जी महाराज
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