हृदयनारायण दीक्षित
प्रकृति में जैव विविधता है। पशुओं के प्रति लगाव का इतिहास पुराना है। मनुष्य और पशुओं के मध्य आत्मीयता का भाव वैदिक साहित्य से लेकर आज तक प्रत्यक्ष दिखाई पड़ता है। कुत्ते हमारे स्वाभाविक परिजन हैं। उनकी सूंघने व सुनने की क्षमता वि
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