प्रेमचंद जी को दी गई अंतिम विदाई, देहदान कर दिया मानवता का संदेश
पूर्वी सिंहभूम, 21 फ़रवरी (हि.स.)। आनंद मार्ग के आध्यात्मिक आदर्शों से प्रेरित प्रेमचंद जी को शनिवार को भावभीनी विदाई दी गई। वैदिक मंत्रोच्चार, प्रभात संगीत और धर्म आमारई साथी, धर्म आमराई प्राण के भावपूर्ण स्वर के बीच उनके पार्थिव शरीर को अंतिम सम
पारंपरिक दाह संस्कार के साथ  प्रेम जी के शव को  चिकित्सा शिक्षा और शोध कार्य के लिए दान किया गया


पूर्वी सिंहभूम, 21 फ़रवरी (हि.स.)। आनंद मार्ग के आध्यात्मिक आदर्शों से प्रेरित प्रेमचंद जी को शनिवार को भावभीनी विदाई दी गई। वैदिक मंत्रोच्चार, प्रभात संगीत और धर्म आमारई साथी, धर्म आमराई प्राण के भावपूर्ण स्वर के बीच उनके पार्थिव शरीर को अंतिम सम्मान दिया गया।

प्रेमचंद जी ने वर्ष 1982 में आनंद मार्ग की दीक्षा ली थी। तब से वे संगठन के आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यों से सक्रिय रूप से जुड़े रहे। समाज सेवा और मानवीय मूल्यों के प्रसार में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।

उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार पारंपरिक दाह संस्कार के स्थान पर उनके शरीर को चिकित्सा शिक्षा और शोध कार्य के लिए दान किया गया। इसी क्रम में उनका पार्थिव शरीर एमजीएम अस्पताल को सौंप दिया गया, ताकि मेडिकल के विद्यार्थियों को अनुसंधान में इसका उपयोग किया जा सके।

देहदान से पूर्व आदर्श सेवा संस्थान परिसर में आनंद मार्ग की पद्धति से ईश्वर प्राणिधान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रभात संगीत प्रस्तुत किया गया। इसके बाद बाबा नाम केवलम कीर्तन किया गया।

सामूहिक ईश्वर प्राणिधान और कीर्तन के उपरांत प्रेमचंद जी के पार्थिव शरीर को मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक