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लाडो लक्ष्मी से ड्रोन दीदी तक योजनाएं
चंडीगढ़, 20 फ़रवरी (हि.स.)। हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार को राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष के अभिभाषण से शुरू हुआ। राज्यपाल का अभिभाषण पूरी तरह से महिलाओं पर फोकस रहा।
राज्यपाल ने बताया कि ‘लाडो लक्ष्मी योजना’ महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन चुकी है। अब तक 9,22,452 महिलाओं को 4 किस्तों में 634 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी में मदद के लिए ‘मुख्यमंत्री विवाह शुगन योजना’ के तहत 71,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। राज्यपाल के अभिभाषण में सबसे आकर्षक पहल ‘ड्रोन दीदी योजना’ रही। ग्रामीण महिलाओं के लिए ड्रोन इमेजिंग एंड इंफोरमेशन सर्विसेज ऑफ हरियाणा लिमिटेड नामक सरकारी कंपनी बनाई गई है। अभी तक 33 ड्रोन दीदियों को प्रशिक्षण देकर तैयार किया जा चुका है और 15 महिलाओं का प्रशिक्षण जारी है। जल्द ही 1,350 महिलाओं को ड्रोन पायलट और तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। ड्रोन तकनीक कृषि, सर्वेक्षण, आपदा प्रबंधन और मैपिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा क्षेत्र है।
प्रदेश में फिलहाल 33 महिला पुलिस थाने और 239 महिला हेल्प डेस्क काम कर रही हैं। अब सरकार ने 7 नए महिला थाने खोलने का फैसला किया है। इनमें लोहारू, बरवाला, नरवाना, समालखा, महम, रादौर और पिहोवा में शहर शामिल हैं। इसके साथ ही महिलाओं को सुरक्षा देते हुए रात की शिफ्ट में काम करने की भी अनुमति दी गई है। सरकार का दावा है कि वर्ष 2025 में महिलाओं के प्रति अपराधों में 16 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं के खिलाफ अपराध चार वर्षों में 67 प्रतिशत तक घटे हैं।
सामाजिक-आर्थिक रूप से महिलाओं को मजबूत करने के लिए स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) मॉडल को सरकार ने व्यापक स्तर पर लागू किया है। 124 अटल श्रमिक-किसान कैंटीनों का संचालन भी महिलाओं के हाथों में है, जिससे हजारों महिलाएं सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं। सरकार का कहना है कि यह मॉडल महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाकर उन्हें मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ रहा है।
राज्य में चल रहा लखपति दीदी कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा भर रहा है। अब तक 1,06,325 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। सरकार ने बेटियों को इंजीनियरिंग और विज्ञान शिक्षा में आगे लाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। कल्पना चावला स्कॉलरशिप योजना के तहत हर वर्ष 250 छात्राओं को एक-एक लाख रुपये की छात्रवृत्ति। विज्ञान रत्न अवॉर्ड के तहत मेधावी छात्राओं को 5 लाख रुपये तक के पुरस्कार दिए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि इन कार्यक्रमों से तकनीकी शिक्षा में बेटियों का नामांकन तेजी से बढ़ा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा