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जोधपुर, 20 फरवरी (हि.स.)। युवा अधिवक्ताओं की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका अधिवक्ता मनीष टाक द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय में दायर की गई। उक्त याचिका पर आज सुनवाई हुई जिसमें न्यायालय द्वारा संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया।
याचिका में यह उल्लेख किया गया कि बार कौंन्सिल ऑफ इण्डिया द्वारा 15 अक्टूबर.2024 को एक व्यापक परिपत्र जारी कर देशभर की राज्य बार कौंन्सिलों एवं बार एसोसिएशनों को युवा अधिवक्ताओं को न्यूनतम मासिक स्टाईपेंड प्रदान करने की अनुशंसा की गई थी। इसकी अनुपालना में बार कौंन्सिल ऑफ राजस्थान ने उक्त परिपत्र राज्य की समस्त बार एसोसिएशनों को अग्रेषित किया गया था। साथ ही इस से पूर्व बार कौंन्सिल ऑफ राजस्थान द्वारा युवा अधिवक्ताओं के लिए स्टाईपेंड विधेयक का प्रस्ताव राज्य सरकार को प्रेषित किया गया था, जो वर्तमान में राज्य सरकार के पास लंबित है। अधिवक्ता मनीष टाक द्वारा इस संबंध में सभी संबंधित को अभ्यावेदन भी प्रस्तुत किया गया था। तत्पश्चात् लोकसभा में भी कनिष्ठ अधिवक्ताओं की आर्थिक कठिनाइयों का मुद्दा उठाया गया, जहां विधि एवं न्याय मंत्री द्वारा समस्या को स्वीकार करते हुए बार कौंन्सिल ऑफ इण्डिया की अनुशंसाओं का उल्लेख किया गया। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य सरकार एवं बार कौंन्सिल ऑफ राजस्थान द्वारा उक्त विषय पर अब तक कोई ठोस एवं प्रभावी निर्णय नहीं लिया गया है।
याचिका में न्यायालय से प्रार्थना की गई है कि राज्य सरकार एवं बार कौंन्सिल ऑफ राजस्थान को निर्देशित किया जाए कि युवा अधिवक्ताओं हेतु न्यूनतम मासिक स्टाईपेंड योजना को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, ताकि न्याय व्यवस्था की आधारशीला माने जाने वाले युवा अधिवक्ता आर्थिक सुरक्षा एवं आत्मविश्वास के साथ अपना पेशा जारी रख सके। जन हित याचिका में अधिवक्ता मनीष टाक द्वारा स्वयं पैरवी की गई।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश