पूसीरे का शिमलगुड़ी-मरानहाट सेक्शन में बदला गया घुमावदार ट्रैक
गुवाहाटी, 20 फरवरी (हि.स.)। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) ने तिनसुकिया मंडल के शिमलगुड़ी और मरानहाट सेक्शन में स्थायी गति प्रतिबंध (पीएसआर) हटाने के क्रम में एक प्रमुख मौजूदा घुमावदार ट्रैक को सफलतापूर्वक बदलते हुए कार्य काे पूर्ण कर लिया है। यह
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के ट्रैक कर्व का दृश्य


गुवाहाटी, 20 फरवरी (हि.स.)। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) ने तिनसुकिया मंडल के शिमलगुड़ी और मरानहाट सेक्शन में स्थायी गति प्रतिबंध (पीएसआर) हटाने के क्रम में एक प्रमुख मौजूदा घुमावदार ट्रैक को सफलतापूर्वक बदलते हुए कार्य काे पूर्ण कर लिया है। यह कार्य उक्त सेक्शन में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और परिचालन दक्षता बढ़ाने में एक और मील का पत्थर है।

पूसीरे के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने शुक्रवार काे बताया कि इस परियोजना को अंजाम तक पहुंचाना एक चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग कार्य था, जिसे ट्रैफिक ब्लॉक के दौरान इंजीनियरिंग, ऑपरेटिंग और ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन (टीआरडी) विभाग के बीच बेहतर समन्वय से आसानीपूर्वक पूर्ण किया गया। मौजूदा रेलवे ट्रैक 4-डिग्री कर्व को बदलते हुए नए 2-डिग्री कर्व से जोड़ा गया। नए ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) तार और मास्ट भी लगाए गए ताकि पुनर्संरेखित हिस्से पर निर्बाध रूप से इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन का संचालन हो सके।

इससे पहले, इस सेक्शन में 400 मीटर लंबा एक कर्व था, जिसमें 4-डिग्री का कर्वेचर था। नए संरेखण के तहत, लगभग 650 मीटर के नव विकसित संरचना पर 2-डिग्री कर्वेचर वाला 660 मीटर लंबा कर्व बिछाया गया है। पुनर्संरेखण के दौरान अधिकतम स्लीव 27.77 मीटर था, जो इंजीनयरिंग कार्यों के पैमाना और सटीकता को प्रदर्शित करता है।

बुनियादी ढ़ांचा को बेहतर बनाने के तहत, नवनिर्मित संरेखण पर 4 मीटर x 4 मीटर के स्पैन और कुल 10.2 मीटर लंबा एक नया ब्रिज संख्या 31 भी बनाया गया है। यह नया ब्रिज और संरचना इस सेक्शन की बेहतर ट्रैक मजबूती, संरक्षा और दीर्घकालीक स्थायित्व सुनिश्चित करेगा।

इस कार्य के पूर्ण होने के साथ, 400 मीटर के हिस्से पर 80 केएमपीएच की स्थायी गति प्रतिबंध की रोक हमेशा के लिए हटा दी गई है। ट्रैक अब 110 केएमपीएच की अधिकतम परमिसिबल स्पीड (एमपीएस) के लिए फिट है, जिससे ट्रेन की गतिशीलता में काफी सुधार होगा, यात्रा का समय कम होगा और समय की पाबंदी बढ़ेगी।

यह कामयाबी एक बार पुनः पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के रेल अवसंचरना को आधुनिक बनाने, संरक्षा मानकों को बेहतर बनाने और पूरे क्षेत्र में तेज़, सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय ट्रेन सेवा प्रदान करने की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय