मप्र में कक्षा 3 से 8वीं तक की परीक्षाएं प्रारंभ, परीक्षा की गोपनीयता एवं शुचिता को बनाए रखने के लिए जि‍लों को एडवायजरी जारी
भोपाल, 20 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश में कक्षा 3 से 8 तक की वार्षिक परीक्षाएं शुक्रवार से प्रारंभ हो गई हैं। परीक्षा की शुचिता एवं गोपनीयता को बनाए रखने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा सभी जिलों को एडवायजरी भी जारी की गई है। साथ ही परीक्षा के दौर
परीक्षा (प्रतीकात्मक)


भोपाल, 20 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश में कक्षा 3 से 8 तक की वार्षिक परीक्षाएं शुक्रवार से प्रारंभ हो गई हैं। परीक्षा की शुचिता एवं गोपनीयता को बनाए रखने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा सभी जिलों को एडवायजरी भी जारी की गई है। साथ ही परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही या संदिग्ध गतिविधि पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

जिलों को जारी एडवायजरी में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वर्तमान परीक्षाओं के दौरान किसी भी प्रकार की विषम स्थिति निर्मित न हो, इसके लिए प्रश्न-पत्रों की प्रिंटिंग एवं वितरण के समय पूर्ण सतर्कता बरती जाए। प्रश्न पत्रों के संबंध में कतिपय असामाजिक तत्वों द्वारा विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भ्रामक सामग्री प्रसारित करने के संबंध में जागरूक रहे। ऐसे मामले संज्ञान में आने पर संबंधित के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए।

राज्य शिक्षा केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा पूर्व प्रश्न-पत्र अथवा उससे मिलती-जुलती फर्जी सामग्री साझा करना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) एवं भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत गंभीर साइबर अपराध है। यह कृत्य न केवल परीक्षा की गोपनीयता को भंग करता है, बल्कि कम आयु के विद्यार्थियों के मनोबल को भी ठेस पहुंचाता है।

राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि उनके अंतर्गत संचालित परीक्षा केंद्रों और सोशल मीडिया समूहों पर सतत निगरानी रखी जाए। किसी संदिग्ध लिंक, चैनल या मोबाइल नंबर की जानकारी प्राप्त होने पर तत्काल राज्य साइबर सेल अथवा स्थानीय साइबर पुलिस थाने को सूचित किया जाए।

साथ ही विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को किसी भी भ्रामक वीडियो या तथाकथित ‘पेपर लीक’ संबंधी दावों पर विश्वास न करने के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस प्रशासन के सहयोग से संदिग्ध सोशल मीडिया चैनलों एवं समूहों की साइबर फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी और भ्रामक सामग्री अपलोड करने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं की पहचान कर उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर