इजरायल की निंदा करने वाला दस्तावेज ‘आपसी सहमति तैयार नहीं था’-विदेश मंत्रालय
नई दिल्ली, 20 फ़रवरी (हि.स.)। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया है कि संयुक्त राष्ट्र में इजरायल की निंदा करने वाले उसके हस्ताक्षर किए दस्तावेज को आपसी सहमति के बाद तैयार नहीं किया गया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साप्ताहिक पत्रकार व
इजरायल की निंदा करने वाला दस्तावेज ‘आपसी सहमति तैयार नहीं था’-विदेश मंत्रालय


नई दिल्ली, 20 फ़रवरी (हि.स.)। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया है कि संयुक्त राष्ट्र में इजरायल की निंदा करने वाले उसके हस्ताक्षर किए दस्तावेज को आपसी सहमति के बाद तैयार नहीं किया गया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साप्ताहिक पत्रकार वार्ता में एक प्रश्न के उत्तर में आज कहा कि यह कोई आपसी सहमति से तैयार किया गया दस्तावेज़ नहीं था, जैसा कि आमतौर पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में होता है। उन्होंने कहा कि हमने मुद्दों को ध्यान में रखते हुए इस पहल से खुद को जोड़ा है। वे यह भी बताना चाहते हैं कि बयान जारी होने के बाद कई अन्य देशों ने भी इसी तरह से इससे खुद को जोड़ा है।

प्रवक्ता ने कहा कि पूरे मुद्दे पर भारत का नज़रिया हाल ही में ‘भारत-अरब लीग’ के साझा बयान में साफ़ किया गया था । इसमें कहा गया था कि दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय कानून, प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों तथा अरब शांति पहल के अनुरूप मध्य पूर्व में न्यायसंगत, व्यापक और स्थायी शांति स्थापित करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की। उन्होंने 1967 की सीमाओं के आधार पर एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीन राज्य की स्थापना का आह्वान किया, जो इज़राइल के साथ शांति से रहे। दोनों पक्षों ने फिलिस्तीनी जनता के अविच्छिन्न अधिकारों का समर्थन किया।

इसके अलावा विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि भारत ने हाल ही में वॉशिंगटन डीसी में आयोजित गाजा शांति के लिए बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में एक पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया था। भारत ने राष्ट्रपति ट्रम्प की गाजा शांति योजना पहल और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के तहत चल रहे प्रयासों का समर्थन किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा