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नई दिल्ली, 20 फरवरी (हि.स.)। लोक सभा अध्यक्ष ने आज डीपफेक और भ्रामक सूचना से उत्पन्न हो रही चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। इन्हें लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग सत्य और विश्वसनीयता को सुदृढ़ करने के लिए किया जाना चाहिए, न कि तथ्यों को विकृत या दबाने के लिए।
भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के अंतर्गत “एआई फॉर डेमोक्रेसी” पर विशेष सत्र को ओम बिरला ने आज संबोधित किया। उन्होंने लोकतांत्रिक विमर्श को भ्रम और दुष्प्रचार से सुरक्षित रखने के लिए तकनीकी प्रगति के साथ-साथ सुदृढ़ सुरक्षा उपाय विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
विधायी कार्यप्रणाली में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि एआई लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण साधन बनकर उभर रहा है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि “डिजिटल संसद” जैसी पहलें नागरिकों और संसद के बीच संवाद को सरल बना रही हैं तथा भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में डिजिटल और सूचना डिवाइड को पाट रही हैं।
भारत की भाषाई विविधता का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष ने “संसद भाषिणी” पहल के महत्व को रेखांकित किया, जिसके माध्यम से एआई आधारित अनुवाद उपकरणों की सहायता से संसदीय बहसों को अनेक क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जा रहा है।
बिरला ने कहा कि भारत की एआई रणनीति समावेशी विकास के सिद्धांत पर आधारित है और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा कृषि जैसे क्षेत्रों में एआई का उपयोग “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में देश की प्रगति को तीव्र करेगा।
एआई के उपयोग की वकालत करते हुए बिरला ने यह भी चेताया कि प्रौद्योगिकी मानव संवेदनशीलता और नैतिक निर्णय का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि एआई एक साधन है, साध्य नहीं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि उभरती प्रौद्योगिकियों के विकास और उपयोग में मानवीय मूल्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और नैतिक मानकों को सर्वोपरि रखना आवश्यक है।
कार्यक्रम में यूनाइटेड किंगडम के एआई एवं ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री कनिष्क नारायण, हंगरी की संसद के उपाध्यक्ष लाजोस ओलाह तथा इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन के महासचिव मार्टिन चुंगोंग सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा