नक्सली सिमटे तो इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों की गणना का काम हुआ तेज, 6 बाघ मिले
बीजापुर, 20 फ़रवरी (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सली प्रभाव के सिमटने के साथ ही इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों की गणना का काम तेज गति से चलने लगा है, और अब तक की गणना में छह बाघों की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है। वन विभाग के अनुसार
नक्सली सिमटे तो इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों की गणना का काम हुआ तेज


बीजापुर, 20 फ़रवरी (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सली प्रभाव के सिमटने के साथ ही इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों की गणना का काम तेज गति से चलने लगा है, और अब तक की गणना में छह बाघों की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है। वन विभाग के अनुसार यह अभियान अप्रैल महीने तक चलेगा। वन विभाग ने गश्त बढ़ाने, अवैध शिकार पर निगरानी मजबूत करने और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया है।

ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इससे अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बार बाघों की संख्या में और इजाफा दर्ज हाे सकता है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि सुरक्षा और संरक्षण के प्रयास इसी तरह जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में इंद्रावती टाइगर रिजर्व फिर से बाघों की मजबूत आबादी वाला क्षेत्र बन सकता है। वाइल्ड लाइफ सीसीएफ स्टाइलो मंडावी कहती हैं, कि अप्रैल में गणना पूरी होने के बाद अंतिम आंकड़े सामने आएंगे, लेकिन शुरुआती संकेत उत्साहजनक हैं।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व लगभग 2799 वर्ग किलोमीटर में विस्तारित देश के महत्वपूर्ण बाघ अभयारण्यों में गिना जाता है। वर्ष 1983 में इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। यह रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता, घने साल व मिश्रित वन क्षेत्र तथा इंद्रावती नदी के विस्तृत जलग्रहण क्षेत्र के लिए जाना जाता है। यहां बाघों के अलावा तेंदुआ, जंगली कुत्ता (ढोल), गौर, भालू, सांभर, चीतल, वन भैंसा और कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियां भी पाई जाती हैं। पिछले कई वर्षों से इस क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों का प्रभाव रहा, जिसके कारण वन अमले की आवाजाही सीमित थी। ट्रैप कैमरे लगाने, मॉनिटरिंग करने और गश्त बढ़ाने में सुरक्षा चुनौतियां सामने आती थीं। नक्सली प्रभाव के कारण कई कोर एरिया ऐसे थे जहां वनकर्मियों का प्रवेश प्रतिबंधित या जोखिम भरा था। यही वजह रही कि पूर्व में बाघों की सटीक गणना करना कठिन हो गया था। अब सुरक्षा हालात में सुधार के बाद पहली बार नेशनल पार्क एरिया में बेखौफ होकर व्यापक स्तर पर गणना की जा रही है।

वन विभाग ने कोर और बफर जोन में बड़ी संख्या में ट्रैप कैमरे लगाए हैं। पगमार्क विश्लेषण, कैमरा ट्रैप डेटा और डीएनए सैंपलिंग के आधार पर बाघों की पहचान की जा रही है। वन विभाग के अनुसार पिछली पुष्टि में यहां पांच बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी। इस बार अब तक छह बाघों की पुष्टि हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि कैमरा ट्रैप से लगातार नई तस्वीरें मिल रही हैं, जिनका विश्लेषण जारी है । संभावना है कि अंतिम रिपोर्ट में संख्या और बढ़ सकती है । बाघों की गणना का यह अभियान राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत किया जा रहा है । देशव्यापी आकलन के दौरान इंद्रावती टाइगर रिजर्व की स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है, क्योंकि यह मध्य भारत के टाइगर लैंडस्केप का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे